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Maharajganj News: निचलौल-बहुआर मार्ग गड्ढे में तब्दील होने से 10 हजार की आबादी परेशान

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निचलौल-बहुआर मार्ग पर गड्ढों से गुजरते वाहन।
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जंगल क्षेत्र के तीन किलोमीटर हिस्से में गहरे गड्ढों से बढ़ा हादसों का खतरा, स्कूली बच्चे और राहगीर सबसे ज्यादा परेशान
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एसडीएम सहित कई अधिकारियों से शिकायत के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई
निचलौल। तहसील क्षेत्र के निचलौल-बहुआर मुख्य मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों, समाजसेवियों और राहगीरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। मार्ग की मरम्मत और पुनर्निर्माण की मांग को लेकर एसडीएम समेत अन्य अधिकारियों से कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। सड़क खराब होने से करीब 10 हजार लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
निचलौल-बहुआर मार्ग तहसील मुख्यालय को दर्जनों मुसहर बस्तियों और कई ग्राम सभाओं से जोड़ता है। यह मार्ग जनपद कुशीनगर के संपर्क के साथ-साथ जिले के दुर्गम गांव सोहगीबरवा वन क्षेत्र तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता भी है। प्रतिदिन हजारों स्कूली बच्चे और ग्रामीण इसी मार्ग से आवागमन करते हैं।
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ग्रामीणों के अनुसार जंगल क्षेत्र में करीब तीन किलोमीटर सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। बरसात में इन गड्ढों में जलभराव होने से दुर्घटनाओं की आशंका और बढ़ जाती है। पहले इस मार्ग पर जंगली जानवरों का खतरा रहता था लेकिन अब जर्जर सड़क लोगों के लिए उससे भी बड़ी परेशानी बन गई है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक और राहगीर गिरकर घायल हो रहे हैं।
समाजसेवी नागेंद्र शर्मा ने बताया कि सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे होने से वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। बरसात और धूल के कारण हालात और खराब हो गए हैं। इससे लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं और जन-धन की हानि हो रही है।
ग्रामीण बबलू गौतम ने कहा कि विशेषकर जंगल क्षेत्र के हिस्से की तत्काल मरम्मत कराई जानी चाहिए, ताकि दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सके और स्कूली बच्चों व आम लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
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वन विभाग ने झाड़ा पल्ला
वन क्षेत्राधिकारी निचलौल सुनील कुमार राव ने बताया कि यह सड़क जंगल क्षेत्र से होकर गुजरती है। वन विभाग के पास इस मार्ग की मरम्मत कराने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग को बजट मिलने पर ही सड़क की मरम्मत कराई जा सकती है। हालांकि विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जयशंकर चौबे और सहायक अभियंता रामनरेश मौर्य से संपर्क का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
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