महराजगंज। निषाद पार्टी युवा प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश सचिव धर्मात्मा निषाद की मौत के मामले में पनियरा पुलिस मंगलवार को एफआईआर की काॅपी लेकर नरकटहां पहुंची। परिजनों को काॅपी मुहैया कराई। सोमवार को दर्ज एफआईआर में नामजद आरोपित जयप्रकाश निषाद निवासी लक्ष्मीपुर थाना कैंपियरगंज जिला गोरखपुर के अलावा तीन लोग अज्ञात हैं। पनियरा पुलिस के मुताबिक धारा 108, 351(3) बीएनएस के तहत केस दर्ज किया गया है। शव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह हैंगिंग बताई गई है।
निषाद पार्टी के पूर्व पदाधिकारी धर्मात्मा निषाद की मौत के बाद मिलने आ रहे लोगों का सिलसिला जारी है। मंगलवार को आजमगढ़ जिले के अजमतगढ़ नगर पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि अजय साहनी नरकटहा पहुंचे। मृतक के भाई परमात्मा निषाद से मुलाकात कर सांत्वना दिया। घटना की जानकारी ली। मंगलवार को भी धर्मात्मा के घर मिलने-जुलने वालों का तांता लगा रहा। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पनियरा थाना के एसआई व कुछ पुलिस कर्मी गांव में मौजूद दिखे।
धर्मात्मा सुसाइड कांड में एसआईटी जांच की उठी मांग
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने निषाद पार्टी युवा प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश सचिव धर्मात्मा निषाद की मौत के मामले में डीजीपी को पत्र भेज एसआईटी टीम से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
डीजीपी को भेजे पत्र में अमिताभ ठाकुर ने लिखा है कि घटना से एक दिन पहले भी धर्मात्मा निषाद ने एक फेसबुक पोस्ट लिखा था। घटना के दिन भी आत्महत्या से सीधा जुड़ा पोस्ट फेसबुक पर लिखा था। सुसाइड नोट में अंकित तथ्य धर्मात्मा निषाद की आत्महत्या को गंभीर बनाते हैं। इस मामले में प्रदेश सरकार के एक मंत्री डॉ संजय निषाद व उनके पुत्र आरोपित किए गए हैं। ऐसे में निष्पक्ष विवेचना की जरूरत है। एसआईटी का गठन कर फेसबुक पर पोस्ट सुसाइड नोट के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन जरूरी है।
सुसाइड कांड में पुलिस की जांच पर लोगों की टिकी निगाह
-फेसबुक पर सुसाइड नोट पोस्ट कर घर में आत्महत्या करने वाले निषाद पार्टी के पूर्व पदाधिकारी धर्मात्मा की मौत के मामले में लोगों की निगाह पुलिस की जांच पर टिकी है। बताया जा रहा है कि घटना के दिन रविवार की सुबह एक फोन कॉल आने के बाद धर्मात्मा घर के अंदर गया। बाद में उसकी मौत की सूचना से हड़कंप मच गया। लोगों का कहना है कि पुलिस मोबाइल के कॉल डिटेल रिकार्ड को खंगाले तो कई अहम सुराग मिल सकते हैं।
घटना के दिन रविवार की सुबह धर्मात्मा के घर की गतिविधियां सामान्य थी। सुबह जागने के बाद धर्मात्मा ने कई लोगों से बातचीत की थी। कुछ लोग मिलने भी आए थे। उनसे भी मुलाकात की थी। घर के अंदर पत्नी खाना बना रही थीं। किसी को यह आभास नहीं था कि कुछ ही देर में मातम का माहौल हो जाएगा। सुबह करीब साढ़े आठ बजे गांव के ही एक परिचित ने धर्मात्मा को घर से ही फोन कर पोस्टर छपवाने के लिए साथ चलने को कहा था। धर्मात्मा बोला था कि कुछ देर बाद चला जाएगा। बताया जा रहा है कि सुबह बातचीत के दौरान एक फोन कॉल आने के बाद धर्मात्मा बात करते हुए कमरे के अंदर गया। उसके बाद उसके मोबाइल पर लगातार कॉल आ रहा था, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हो रहा था। कमरे में जाकर देखने के बाद धर्मात्मा फांसी के फंदे के सहारे लटका मिला। फंदे से उतार कर इलाज के लिए परिजन पीपीगंज ले गए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फेसबुक पर पोस्ट सुसाइड नोट के बाद धर्मात्मा की मौत का मामला सुर्खियों में है। पुलिस केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांव में चर्चाओं पर गौर करें तो घटना से तीन दिन पहले कैंपियरगंज थाने का एक पुलिस कर्मी धर्मात्मा निषाद का मोबाइल नंबर ढूंढ रहा था। बता रहा था कि गोरखपुर के एक पुलिस अधिकारी उससे बात करना चाहते हैं। मौत के बाद लोग इस सवाल का जवाब जानना चाह रहे हैं कि किस वजह से कैंपियरगंज पुलिस धर्मात्मा का नंबर ढूंढ रही थी। अधिकारी क्या बात करना चाहते थे। पुलिस की जांच पर सभी की निगाह टिकी है।