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Maharajganj News: फार्मर रजिस्ट्री में गाटा छूटा, घट गया खाद का कोटा

Tue, 14 Jul 2026 01:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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सिद्धार्थनगर। खाद वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए लागू की गई फार्मर रजिस्ट्री की व्यवस्था कई किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। जल्दबाजी, तकनीकी दिक्कत और जानकारी के अभाव में बड़ी संख्या में किसानों की फार्मर रजिस्ट्री में सभी गाटा नंबर दर्ज नहीं हो सके हैं।
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इसका असर खाद वितरण पर पड़ रहा है। साधन सहकारी समितियों और निजी उर्वरक विक्रेताओं को फार्मर रजिस्ट्री में दर्ज रकबे के अनुसार ही खाद देने की अनुमति है। ऐसे में वास्तविक जोत अधिक होने के बावजूद किसानों को उनके कोटे के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है।
एक हेक्टेयर भूमि के लिए अधिकतम पांच बोरी डीएपी और सात बोरी यूरिया के आवंटन की व्यवस्था है। जिन किसानों की पूरी भूमि फार्मर रजिस्ट्री में दर्ज नहीं है, उन्हें पूरी खाद भी नहीं मिल पा रही है। खरीफ सीजन में रोपाई के बीच इस व्यवस्था से किसानों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
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शोहरतगढ़, बढ़नी, लोटन और डुमरियागंज क्षेत्र के किसानों ने बताया कि उनकी जमीन कई गांवों में है लेकिन फार्मर रजिस्ट्री में केवल एक गांव का ही गाटा दर्ज हो पाया। इससे खाद कम ही मिल पा रही है। कई किसानों ने बताया कि अब समिति और निजी दुकानदार भी रजिस्ट्री में दर्ज रकबे के अनुसार ही खाद दे रहे हैं।
लोटन क्षेत्र के किसान रामनवल यादव ने बताया कि किसान सम्मान निधि प्रभावित होने की आशंका के कारण सभी गाटा नंबर दर्ज नहीं कराया था। अब दर्ज रकबे के अनुसार ही खाद मिल रही है।
राकेश मिश्र ने बताया कि उनके खेत तीन गांवों में हैं लेकिन रजिस्ट्री में केवल एक गांव का विवरण दर्ज हुआ है। दीप नारायण और रामकुमार शर्मा ने भी बताया कि सभी गाटा दर्ज न होने से खाद मिलने में परेशानी हो रही है। पेंडारी मुस्तहकम निवासी किसान रामकृपाल ने कहा कि उनके पास दो अलग-अलग ग्राम पंचायतों में खेती योग्य करीब 25 बीघा भूमि है। 5 बीघा उनके पैतृक गांव पेंडारी मुस्तहकम और 20 बीघा पड़ोस के गांव माली मैनहा में है लेकिन फार्मर रजिस्ट्री में सिर्फ पांच बीघा खेत ही दर्ज हुआ है। खाद नहीं मिलेगी तो खेती कैसे होगी कुछ समझ में नहीं आ रहा। पेंडारी मुस्तहकम गांव के ही शिवसागर का कहना है कि उनके पास करीब 11 बीघा खेत है, जिसमें करीब छह बीघा पड़ोस के गांव माली मैनहा में है। पांच बीघा उनके गांव पर है, जिसकी फार्मर रजिस्ट्री हो चुकी है।
माली मैनहा के खेत की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई है। सोमवार को धनोहरी में दुकान पर गए तो दुकानदार ने सिर्फ एक बोरी यूरिया मिलने की बात कही। खाद न लेकर लौट आया।
किसान विनय शुक्ल ने कहा कि दो राजस्व गांवों में जमीन होने पर केवल एक गांव का रकबा दर्ज हो रहा है। इससे वास्तविक जोत के बजाय कम रकबे के अनुसार ही खाद मिल रही है। संवाद
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