अड्डा बाजार। पंचशील के उपदेश का अनुसरण करके देश और समाज का सर्वांगीण विकास किया जा सकता है। आज दुनिया बौद्घ के धर्म और मार्ग को अपना रहा है। बौद्घ धर्म मामने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हमें इस बात पर गर्व करना चाहिए कि हम उस धरती पर निवास कर रहे हैं, जहां जहां भगवान बुद्घ रहे हैं।
ये बातें बुधवार को देवदह में बौद्ध महासम्मेलन के पांचवें दिन बुधवार को सारनाथ से आए भंते रत्नाकर ने संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि बुद्ध के पंचशील उपदेशों को हमें आज्ञा के रूप में नहीं, बल्कि व्यवाहारिक तौर पर प्रशिक्षण के नियम के रूप में समझना चाहिए। यह ऐसा अभ्यास है जिसका विकास करके ध्यान, ज्ञान, और दया को पाया जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन सुनील गौतम और अध्यक्षता देवदह बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने किया। इस अवसर पर धम्मपाल, महिपाल, शुभसागर, आनन्द, ग्यानशील, राजाराम, महेंद्र जायसवाल, लक्ष्मीचन्द्र पटेल, चन्द्रभान, यशोदा भारती, शैलेश भारती, नाथ प्रसाद, प्रह्लाद, रामबेलास, तपसी निषाद, रामउजागर , शिवशंकर, चन्द्रबली, शिवनाथ, परशुराम, योगेंद्र, रामलगन, संतराम, ईश्वर निगम, कोदई आदि मौजूद रहे।