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Maharajganj: पशुपतिनाथ मंदिर हिंदुओं के लिए है प्रमुख तीर्थ स्थल, माना जाता है केदारनाथ मंदिर का आधा भाग

Sun, 31 Jul 2022 04:44 PM IST
अनुराग सक्सेना संवाद न्यूज एजेंसी, भैरहवां (नेपाल)

सार

नियम कानून, पूजा-पाठ के तौर तरीके सब बदले हुए हैं। यहां तक कि पूजा और पूजन सामग्री के चढ़ावे में आपको मंदिर के नियम का पालन करना होगा। सब कुछ समय और चरणबद्ध हो गया है। पहले पूजा या रुद्राभिषेक या और कोई पूजा कराने के लिए पुजारियों की दक्षिणा स्वेच्छिक थी, अब नहीं। मंदिर प्रशासन ने बकायदे अपना रेट तय कर दिया है।
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नेपाल में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर दुनिया भर के हिंदू धर्मावलंबियों का प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहां सावन या शिवरात्रि में लाखों श्रद्धालु आते हैं। इसके अलावा यहां बारहों मास श्रद्धालुओं का रेला लगा रहता है। सावन में नेपाल के इस विख्यापित मंदिर में काफी कुछ बदल गया है। अब आप पहले की तरह बेधड़क जाकर भोलेनाथ के रूप का दर्शन नहीं कर सकते।

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नियम कानून, पूजा-पाठ के तौर तरीके सब बदले हुए हैं। यहां तक कि पूजा और पूजन सामग्री के चढ़ावे में आपको मंदिर के नियम का पालन करना होगा। सब कुछ समय और चरणबद्ध हो गया है। पहले पूजा या रुद्राभिषेक या और कोई पूजा कराने के लिए पुजारियों की दक्षिणा स्वेच्छिक थी, अब नहीं। मंदिर प्रशासन ने बकायदे अपना रेट तय कर दिया है और इसे बड़े से बोर्ड में चस्पा कर दिया है। विशेष पूजा के लिए अलग से एक प्रकोष्ठ बना दिया गया है जिनके माध्यम से ही आप मनचाही पूजा करा पाएंगे। पूजा की फीस यहां जमा कर आप को रसीद थमा दी जाएगी।

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पशुपतिनाथ में 1,313 रुपये से लेकर 15,62,500 रुपये तक की विशेष पूजा होती है। पशुपतिनाथ को शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, केदारनाथ मंदिर का आधा भाग माना जाता है। यह मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू से तीन किलोमीटर उत्तर-पश्चिम देवपाटन गांव में बागमती नदी के तट पर स्थित है।

मंदिर के पुजारी गणेश ने बताया कि मान्यता है कि भोलेनाथ के देह स्थल केदारनाथ और मुख स्थल पशुपतिनाथ के दर्शन के बाद ही बारहों ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने का पुण्य प्राप्त होता है। पशुपतिनाथ में भैंस के सिर और केदारनाथ में भैंस की पीठ के रूप में शिवलिंग की पूजा होती है। मुख्य द्वार पश्चिम मुखअभिषेक सुबह 9.30 से 11.30 तक सभी द्वार खुल जाते है।

मंदिर खुलने का समय

  • प्रातः 5 बजे से दोपहर 1 बजे तक
  • सायं 5 बजे से 7 बजे तक

आरती का समय

  • गर्मी मे सायं 6.30 से 7 बजे
  • सर्दी में 6.00 से 6.30 बजे
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