फरेंदा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनकटी में डॉक्टरों की भरमार है, लेकिन मरीजों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों की मनमानी से मरीज हलकान हैं। अस्पताल की अव्यवस्था व अधिकारियों की मनमानी से मरीजों को इलाज के लिए घंटों लाइन लगाकर खड़ा रहना पड़ता है।
फरेंदा के सीएचसी बनकटी में बुधवार को 11:46 बजे ओपीडी के दौरान अव्यस्था देखी गई। एक ही डाॅक्टर कक्ष में दो डाॅक्टर एक साथ ओपीडी कर रहे थे। इसमें डॉ. मुकेश गुप्ता व डॉ. शाश्वतसेन मरीजों का इलाज कर दवा दे रहे थे। कमर दर्द का इलाज कराने पहुंची सीमा ने बताया कि भीड़ के कारण इलाज कराने में देरी हो रही है। दुर्घटना में घायल सुधाकर इलाज के लिए पहुंचे तो सबसे पहले पंजीकरण काउंटर से पर्चा लेने के बाद डॉ. शाश्वतसेन गुप्त के पास पहुंचे जिनका जांच कर दवा लेने की सलाह दिए। ओपीडी कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ लगी हुई थी। 105 मरीज पंजीकरण करा चुके थे। इंदुमती एक्सरे कराने पहुंची तो पता चला कि तीन दिन से एक्सरे मशीन खराब है। मजबूरी में बाहर से एक्सरे कराना पड़ा है। उनको सीने में दर्द की समस्या थी। एबुलेंस से हार्ट के मरीज अली हसन पहुंचे जिनका इलाज कर उनको मेडिकल काॅलेज के रेफर कर दिया गया। वहीं गैस की बीमारी से पीड़ित सैनिक गांव के बल बहादुर पहुंचे जिनका इलाज चल रहा था।
महिला चिकित्सक कक्ष में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हनुमान एंटी रैबीज इंजेक्शन लगा रहे थे। 11.50 बजे फार्मासिस्ट कक्ष में गोपाल चतुर्वेदी बैठे मिले। पूछने पर पता चला कि एक फार्मासिस्ट गजेंद्र उपाध्याय इमरजेंसी ड्यूटी करने के बाद अभी रूम पर गए हैं। 12 बजे तक अधीक्षक एमपी सोनकर के कमरे में ताला लटक रहा था। 12:06 बजे फरेंदा खुर्द के रामसुमेर आंख के इलाज के लिए पहुंचे थे तो कक्ष बंद रहा काफी देर इंतजार किए लेकिन डॉक्टर नहीं पहुंचे थे।
12:24 बजे प्रसव कक्ष के बगल के कक्ष में संविदा महिला डाॅक्टर रोचस्मति पांडेय महिलाओं की जांच कर रही थीं। स्टाॅफ नर्स ममता मिश्रा की ड्यूटी थी। प्रसव कराने पहुंची एक महिला ने बताया कि ऑपरेशन से प्रसव हुआ है। इसके एवज में छह हजार रुपये भी लिए गए हैं। लोगों ने बताया कि दिन में महिला डाॅक्टर रहती हैं रात में प्रसव की जिम्मेदारी स्टाफ नर्स के हवाले रहता है।
बेकार पड़ी है अल्ट्रासाउंड मशीन
सीएचसी बनकटी में करीब सात वर्षों से रखी हुई अल्ट्राॅसाउंड मशीन बेकार पड़ी हुई हैं। इसके कारण मरीजों को अस्पताल के बाहर ज्यादा पैसे देकर अल्ट्रासाउंट कराना पड़ता है। अस्पताल परिसर में घुसते ही सबसे पहले दलालों से गुजरना पड़ता है। डॉक्टर कक्ष के बाहर दुकानों पर के लड़के खड़े मिलते हैं जो पर्ची मिलते ही अपनी दुकान पर ले जाकर दवा खरीदवाते हैं।
अस्पताल में सात डाक्टर तैनात हैं, दो डाक्टर डयूटी पर रहे यह गलत हैं बिना कारण बताए अनुपस्थित डाक्टरों से पूछताछ की जाएगी। खराब एक्सरे मशीन को ठीक कराने के लिए पत्र भेजा गया है। मरीजों का इलाज पहली प्राथमिकता रहती है। बेहतर ढंग से स्वास्थ्य सुविधा देने की कोशिश की जा रही है।
डॉ एमपी सोनकर, अधीक्षक, सीएचसी बनकटी