महराजगंज। गोरखपुर-सोनौली हाईवे पर जगह-जगह ढाबे खुले हैं। गोरखपुर, लखनऊ, दिल्ली जाने वाली बसें इन ढाबों पर रुकती हैं। मजबूरी में यात्री इन ढाबों पर खाना खाने को मजबूर हैं।
ढाबे के संचालक व परिवहन विभाग के कर्मचारियों की मिली भगत से बस में बैठे यात्रियों को घटिया खाना खिलाने के साथ-साथ मनमाना पैसा वसूल करते हैं। इन ढाबों पर बेचे जा रहे खाने-पीने के सामानों को चेक करने वाला कोई जिम्मेदार नहीं है। ढाबे के संचालक बस के कंडक्टर और ड्राइवर के लिए अलग से खाना बनाया जाता है।
रोडवेज बसों के लिए एक रजिस्टर्ड ढाबा है, लेकिन चालक उस ढाबे पर अपनी बसें नहीं रोकते हैं। नेपाल के पाल्पा निवासी संजय गुरुग, बुटवल के श्याम ज्ञावाली, अमर बहादुर, बसंत थापा ने कहा कि हम बस दिल्ली जा रहे थे। संपतिहां के आगे एक ढाबे पर बस रुकी। चालक परिचालक ने कहा कि खाना खा लीजिए आगे बस नहीं रुकेगी। ऐसी स्थिति में हम लोगों को इसी ढाबे पर खाना खाना पड़ा। खाना भी ठीक नहीं मिला। रकम भी ज्यादा लगा।
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परिवहन विभाग की ओर से जंगल ट्रीट नाम से कैंपियरगंज में एक ढाबे को रजिस्टर्ड किया गया है। इस ढाबे पर चालक को रुकना है और 63 रुपये की वहां पर स्लिप कटवानी है। अनाधिकृत ढाबे पर नहीं रोकना है। अगर अनाधिकृत ढाबे पर कोई बस रुकी हुई पाई जाती है तो चालक और परिचालकों से 2000 रुपये का जुर्माना जमा कराया जाता है।
-नंद किशोर चौधरी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, सोनौली