विशेषज्ञों ने अभिभावकों को निगरानी और संवाद की दी सलाह
ऑनलाइन गेम की लत से बढ़ी आत्महत्या, चोरी, दुर्घटनाएं जैसे वारदात
निचलौल। गाजियाबाद में ऑनलाइन गेम खेलने की लती तीन नाबालिग बहनों ने खुदकुशी कर ली। घटना के बाद से बच्चों के ऑनलाइन गेमिंग खेलने को लेकर विशेषज्ञ चिंता जाहिर कर रहे हैं। देश के छोटे बड़े शहरों में ऑनलाइन गेमिंग के प्रभाव में बच्चों के द्वारा हिंसक घटनाएं, चोरी करने सहित अन्य मामले सामने आ रहे हैं। समाजशास्त्री और तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों को सचेत रहने के साथ ही दोस्त की तरह बच्चों पर निगरानी करनी होगी।
बृहस्पतिवार को निचलौल शहर निवासी संजय राय मंटू ने बताया कि ऑनलाइन गेमिंग का असर हर रोज बढ़ता चला जा रहा है। ऑनलाइन गेम बच्चों को आत्मघाती कदम तक ले जा रहा है। यह बेहद गंभीर और खतरनाक संकेत है। ऑनलाइन गेम और मोबाइल स्क्रीन का लती होने के बाद बच्चों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही हैं। ऐसे में बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के साथ ही उनके साथ अच्छा व्यवहार रखना जरूरी है। सुरेश राजभर, विनोद, रवि गुप्ता और गुड्डू ने बताया कि बच्चों में मोबाइल गेम की लत के खतरनाक नतीजे सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर गेमिंग अनुभवों के उदय और प्रौद्योगिकी की सर्वव्यापी उपलब्धता के साथ बच्चे आभासी दुनिया के आकर्षण के प्रति तेजी से संवेदनशील हो रहे हैं। इससे मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ रहे हैं।
गेम की लत का मानसिक स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव
शहर स्थित राजेन्द्र प्रसाद तारा चंद पीजी कॉलेज के समाजशास्त्र के प्रवक्ता राजन आर्या ने बताया कि बच्चे घंटों गेमिंग में मग्न रहते हैं, इस कारण वे अक्सर शैक्षणिक जिम्मेदारियों की उपेक्षा भी करते हैं। किशोरों में वीडियो गेम की लत मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इसमें चिंता, अवसाद और सामाजिक अलगाव में वृद्धि शामिल है। अत्यधिक गेमिंग अक्सर खराब शैक्षणिक प्रदर्शन और किशोरों के नींद के पैटर्न में गड़बड़ी का कारण बनती है। यह समस्या समाज में रोग की तरह है।
सही और गलत का अंतर समझने में लगता है समय
मनोवैज्ञानिक जितेंद्र निगम का कहना है कि अगर बच्चा ऑनलाइन गेमिंग कर रहा है तो शुरू से ही नजर रखनी चाहिए। सारा दोष बच्चों का नहीं है। अगर बच्चा गेम खेल रहा है तो कितनी देर तक खेल रहा है, कौन सा गेम खेल रहा है इसकी मॉनिटरिंग की जानी चाहिए। दूसरी चीज की बच्चों का जो दिमागी विकास है, उसमें सही और गलत का अंतर समझने में समय लगता है। अगर बच्चा किसी तनाव से गुजर रहा है। तो माता-पिता को उससे बात करनी चाहिए। बच्चे से बात करने पर तनाव का असली कारण सामने आएगा।