महराजगंज। मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत मजदूरी के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने नई व्यवस्था लागू की है।
अब मनरेगा मजदूरों की हाजिरी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी, जिसके लिए राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) सॉफ्टवेयर लॉन्च किया गया है। इस व्यवस्था के तहत प्रोजेक्ट ओर मनरेगा मजदूरों का फोटो अपलोड करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।
जानकारी के अनुसार, जिले में मनरेगा के तहत विभिन्न विकास कार्यों में मजदूरों को लगाया जाता है। इन कार्यों में कच्चे रास्तों का निर्माण, तालाब खोदाई, सुंदरीकरण, आंगनबाड़ी केंद्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, नाली और खड़ंजा निर्माण जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। जिले की 882 ग्राम पंचायतों में हर माह लगभग एक से डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान मनरेगा मजदूरी के रूप में किया जाता है। हालांकि, अक्सर ग्राम पंचायतों में फर्जी मजदूरों को दिखाकर लाखों रुपये की हेराफेरी की शिकायतें सामने आती रही हैं। इन शिकायतों में ग्राम प्रधानों और सचिवों पर फर्जी हाजिरी लगाकर धनराशि हड़पने के आरोप लगते हैं, जो मुख्य विकास अधिकारी और जिलाधिकारी तक पहुंचती हैं। इन गड़बड़ियों को रोकने के लिए शासन ने एनएमएमएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था बनाई है। इस सॉफ्टवेयर के जरिए कार्यस्थल पर मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति दर्ज की जाएगी।
मजदूरों को कार्यस्थल पर सॉफ्टवेयर के सामने अपना चेहरा दिखाना होगा और पलक झपकाने जैसे बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऐसा न करने पर उनकी अनुपस्थिति दर्ज की जाएगी। ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में मनरेगा के तहत कार्यरत मजदूरों की संख्या और कार्यों की प्रगति पर नजर रखने के लिए यह सॉफ्टवेयर एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। अब तक की शिकायतों के अनुसार, कई बार उन मजदूरों के नाम पर भुगतान कर दिया जाता था,जो कार्यस्थल पर मौजूद ही नहीं होते थे।