महराजगंज। समय के साथ सिर्फ सभ्यता और संस्कृतियां ही नहीं बदलती बल्कि आदतें भी बदल जाती हैं। इस सोच के साथ जिले में आजीविका समूह की महिलाएं एक नया प्रयोग करने जा रही हैं। वह एक रुपये में माहवारी (पीरियड) पैड बनाने जा रही हैं जिससे महिलाएं उन दिनों में पुराने कपड़ों या कुछ अन्य चीजों का इस्तेमाल न करें। वह समूह से उत्पादित पैड को प्रयोग में लाकर न सिर्फ संक्रामक बीमारियों से खुद को सुरक्षित रख सकेंगी, बल्कि घरवालों को भी इससे बचाएंगी। इसके लिए जनपद में तीन लाख रुपये से मशीन आई है, जिसके लिए एक समूह की 13 महिलाओं को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है।
विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस 28 मई को मनाया जाता है। इसके पीछे उद्देश्य यही है कि परंपरागत तरीकों व सामग्री को छोड़कर महिलाएं आगे बढ़ें। छोटा व वन क्षेत्र की अधिकता वाला जिला होने के कारण महराजगंज में माहवारी स्वच्छता पर कम ध्यान दिया जाता था। लेकिन अब स्थिति बदली है। बीडीओ की पहल पर तीन लाख रुपये से बैंगलोर माहवारी पैड बनाने की मशीन आई है। यहां निर्माण के लिए मुख्यालय स्थित लखिमा थरुआ के पार्वती आजीविका समूह की महिलाओं ने पैड बनाने की जानकारी हासिल की है। अध्यक्ष नूतन की अगुवाई में प्राकृतिक तरीके से पैड बनाने की जानकारी 13 महिलाओं ने प्राप्त की है। उनका कहना कि वह लोग 15 जून से पैड निर्माण व एक रुपया प्रति पैड के हिसाब से बिक्री प्रारंभ करेंगे। संवाद
इस उद्देश्य से जुड़कर महिलाएं अपने ही समाज का भला करने जा रही हैं। बीडीओ अतुल कुमार के निर्देश पर प्रशिक्षण संपन्न हुआ यह हर्ष की बात है।
नागेंद्र पांडेय, एडीओ, आईएसबी
बहुत ही अच्छी पहल सदर ब्लाॅक की है। आजीविका समूह की महिलाएं कम दर पर पैड देंगी तो हर महिला इसे प्रयोग में लाएगी और इनका व्यापार बढ़ेगा।
लवली वर्मा, बीसीपीएम, सदर