अब इतिहास में दर्ज हो जाएगी थ्री नॉट थ्री राइफल
महराजगंज। पहले विश्वयुद्ध में दुश्मनों को धूल चटाने वाली थ्री नॉट थ्री राइफल अब इतिहास में दर्ज हो जाएगी। इस हथियार को प्रशासन ने मालखानों में जमा कराने का निर्देश दिया है। जिले के थानों में इसकी सूचना दे दी गई है।
70 साल से अपराधियों के लिए दहशत का सबब बनी थ्री नॉट थ्री राइफल कभी यूपी पुलिस का भरोसेमंद हथियार हुआ करता था। समय बदला और आज के आधुनिक दौर की ऑटोमैटिक राइफलों के आगे इस असलहे का रौब खत्म हो गया। शासन की ओर से इसके प्रयोग पर पूरी तरह पाबंदी लगाने का आदेश जारी कर दिया है।
जानकारों के मुताबिक थ्री नॉट थ्री का सबसे पहले इस्तेमाल वर्ष 1914 के विश्व युद्ध में किया गया था। इसकी मारक क्षमता करीब 2 किलोमीटर थी। यूपी पुलिस के पास यह हथियार 1945 में आया। इससे पहले मस्कट राइफल 410 का इस्तेमाल होता था। वक्त के साथ पुलिस को एसएलआर मिल गया। इसके बाद में एके-47 समेत दूसरे ऑटोमैटिक असलहों का जमाना आया। अब प्रशासन ने इस हथियार पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है।
असलहे की लोकप्रियता चरम पर रही
थ्री नॉट थ्री की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि तमाम कंपनियों के उत्पाद भी इस नाम से निकाले जाने लगे थे। अब थ्री नॉट थ्री की जगह इंसास राइफल्स ने ले ली है।
एसपी रोहित सिंह सजवान ने बताया कि थानों में उपलब्ध थ्री नॉट थ्री राइफल को मालखाने में जमा करने का निर्देश दिया गया है। अब संतरी को इंसास रायइल दी जाएगी। इस दिशा में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।