महराजगंज। धंधेबाजों ने कमाई का नया रास्ता ढूंढ लिया है। अब एंड्राइड मोबाइल फोन में खेल कर दिया गया। बगैर बिल वाउचर के सामान मंगा कर उसे नेपाल में बेच दिया जाता है। इसमें खतरा भी कम है और अच्छी आमदनी भी हो जा रही है।
हर माह करोड़ों का धंधा हो रहा है। नेपाल में जिस सामान में नेपाल में भारी भरकम ड्यूटी है। उस समान की तस्करी शुरू हो जाती है। मामला तब सामने आता है जब इसकी बरामदगी होती है।
जानकारी के अनुसार, बीते माह नेपाल के रूपनदेही जिले की पुलिस ने करीब 20 लाख के एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए थे। जो भारतीय क्षेत्र से तस्करी कर नेपाल भेजे गए थे। नेपाल सीमा तक बगैर बिल बीजक के मोबाइल बस एवं अन्य प्राइवेट साधनों से लाया जाता है। इसे एक दो पीस कर नेपाल के भैरहवा में रखा जाता है।
उसके बाद नेपाल के काठमांडों, नारायण घाट, पोखरा जैसे महानगरों में सप्लाई कर दी जाती है। आईफोन सहित भारत के ब्रांडेड मोबाइल फोन की नेपाल में काफी डिमांड है। एक से दो लाख रुपयेेेेेेेे के मोबाइल पैकेट में रख कर कैरियर नेपाल पहुंचा देते हैं। उसके बाद डिब्बे को पहुंचाया जाता है। एक कैरियर ने बताया कि एक आईफोन पहुंचाने पर एक हजार और अन्य मोबाइल के लिए 800 रुपये मिलते हैं। एक दिन में करीब दस मोबाइल एक कैरियर पहुंचा देता है। उसने बताया कि बस डिपो के पीछे मोबाइल फरेनिया गांव में सड़क पर चलते समय दे दिया जाता है। केवल रास्ते से उठा कर नेपाल की एक दुकान में देने होते हैं।
सूत्रों की मानें तो नौतनवा कस्बा में बड़े मोबाइल व्यवसायियों की दुकानें भारत नेपाल सीमा के सोनौली, भगवानपुर, ठूठीबारी आदि स्थानों पर हैं। नौतनवा कस्बा अवैध मोबाइल कारोबार का अड्डा बना हुआ है। कस्बे में मोबाइल की एक बड़ी दुकान है जिसकी सोनौली में भी दुकान है। जहां से मोबाइल सप्लाई किया जाता है।
इस दुकान से उस दुकान पर माल जाता है। वहां से तस्कर मोबाइल पॉकेट में रखकर पैदल ही सीमा पार कर देते हैं। बताया जाता है कि कारोबारी का तार कई शहरों से जुड़ा है। 85000 का मोबाइल नेपाल में 150000 में बिकता है।
पैकिंग बदल कर नए रेट में बेंच देते हैं। सूत्र बताते हैं कि नेपाल में आई फोन की डिमांड अधिक है इसलिए सीमा पर आईफोन मोबाइल तस्करी जोरों पर है।
कटिंग का माल का कोई लेखा जोखा नहीं होता : एक ही जीएसटी पेपर पर कई बार एक ही दिन में माल चला जाता है। बड़े दुकानदारों के नौतनवा में अवैध गोदाम भी हैं जहां से नेपाल के व्यापारी कटिंग का माल ले जाते हैं।
कटिंग का माल का मतलब बिना जीएसटी का माल जो जीएसटी की आड़ में चलता है। उसका बिल नहीं होता है। कटिंग का माल का कोई लेखा जोखा नहीं होता है। ऐसा माल गोरखपुर, दिल्ली से आता है।