फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मधवलिया गोसदन के गांधी उपवन में पौधे ढूंढ़ते रह जाओगे

विज्ञापन
विज्ञापन
मधवलिया गोसदन के गांधी उपवन में ढूंढते रह जाएंगे पौधे
विज्ञापन

महराजगंज। मधवलिया गोसदन अक्सर सुर्खियों में आ ही जाता है। इस गोसदन में गायों को मरने में डीएम समेत कई अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी। अब इस गोसदन में पौधों के रखरखाव को लेकर प्रश्नचिह्न खड़ा हुआ है। इस गोसदन में पांच एकड़ में गांधी उपवन बना है। यहां लगे पौधे ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे रहे हैं। जबकि गांधी में उपवन में पांच हजार पौधे लगाए गए थे। इसके लिए मोटी रकम भी व्यय हुआ था। लेकिन, ताजा स्थिति देखने में इसके रखरखाव को लेकर जागरूकता की पोल खुल जाती है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्राम पंचायत मैरी के मधवलिया गोसदन के गांधी उपवन में 9 अगस्त 2019 को पांच हजार पौधे लगे थे। पौधों को लगाने में 182 रुपये की दर से मजदूरी भुगतान हुई थी। इस तरह श्रम पर 51,870 रुपये व्यय हुए थे। 755 मानव दिवस का सृजन हुआ था। सामग्री पर 4500 रुपये खर्च हुए थे। लेकिन, हकीकत में दूर-दूर तक पौधे दिखते ही नहीं हैं। ये पौधे कहां गए किसी को कुछ पता नहीं है।
विज्ञापन

हरेंद्र प्रसाद, सुभाष, छोटेलाल, श्रीकांत ने बताया कि पौधों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं बरती गई। यही कारण है कि पौधे लगने के कुछ माह बाद ही सूख गए। यहां हरियाली सिर्फ फाइलों में दिखती है। पौधे तो हर कोई ढूंढता रह जाएगा। पौधों का नहीं मिलना व्यवस्था की खामियों को उजागर करने के लिए काफी है। गांधी उपवन को हरा भरा रखने के मकसद से पौधों को लगाया गया था। लेकिन, हकीकत में हरियाली नहीं वीरानगी है।
विज्ञापन

ग्राम प्रधान मैरी कोइली देवी के पति खदेरू प्रसाद ने बताया कि वर्तमान में गांधी उपवन में पौधे नहीं दिख रहे। यह पौधे हमारे कार्यकाल में नहीं लगे थे जिससे इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं है।
गोसदन में लगे पौधों के बारे में जानकारी नहीं है। इसके बारे में जिम्मेदारों से जानकारी ली जाएगी, फिर मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-गौरव सिंह सोगरवाल, सीडीओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें