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Maharajganj News: एक अप्रैल से आयकर के नए नियम, 12 लाख तक की आय पर नहीं लगेगा टैक्स

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अनावश्यक जुर्माने से निजात, चार लाख आय टैक्स फ्री
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1961 का स्थान लेगा 2025 आयकर अधिनियम
नए सत्र से बदल जाएगा 65 वर्ष पुराना आयकर अधिनियम
महराजगंज। नए वित्तीय वर्ष से आम लोगों की सुविधा के लिए 65 वर्ष पुराने आयकर अधिनियम की जगह 2005 आयकर अधिनियम प्रभावी किया जा रहा है। नया अधिनियम अनावश्यक जुर्माने से निजात दिलाने वाला साबित होगा। चार लाख की आय श्रेणी कर मुक्त हो जाएगी। रिबेट के साथ 12 लाख तक की आय पर अब टैक्स शून्य रहेगा।
नया वित्तीय सत्र 2026-27 आय करदाताओं के लिए सरलीकरण, आसान अनुपालन और अधिक लाभ की सहूलियत वाला बताया जा रहा है। दीवानी न्यायालय महराजगंज के वरिष्ठ अधिवक्ता व टैक्स पैनलिस्ट अभिजीत सिंह के मुताबिक इसे टैक्स ईयर 2026-27 से प्रभावी किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली सरलीकरण है। अनावश्यक प्रावधानों के हटा दिए जाने से मुकदमे कम होंगे। 1961 आयकर अधिनियम में 819 धाराएं थीं, जिन्हें घटाकर नए कानून में सिर्फ 536 किया गया है। अधिनियम उद्घोषणा के शब्दों को घटाया गया है। पहले अधिनियम 5.12 लाख शब्दों में व्यक्त था जिसे सीमित करते हुए 2.60 लाख शब्दों में किया गया है।
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इससे अधिनियम समझने में भी आसान हुआ है। नई व्यवस्था में पूर्व वर्ष और निर्धारण वर्ष की जगह केवल टैक्स ईयर की अवधारणा लागू होने से गणना और रिटर्न फाइलिंग में भ्रम नहीं रहेगा।
यह स्लैब पहली अप्रैल से प्रभावी

-चार लाख तक - शून्य
-4 से 8 लाख - 5 फीसद
-8 से 12 लाख-10 फीसद
-12 से 16 लाख-15 फीसद
-16 से 20 लाग- 20 फीसद
वर्जन
रिबेट के साथ 12 लाख तक की आय पर अब टैक्स शून्य रहेगा, जबकि वेतनभोगियों के लिए 75 हजार के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ 12.75 लाख तक आय टैक्स-फ्री हो जाएगी। आईटीआर फाइलिंग की अंतिम तिथियों में भी बदलाव किया गया है। इससे व्यापारियों को राहत मिलेगी।
-केएम पटेल, सीए महराजगंज

आईटीआर एक और आईटीआर दो के लिए 31 जुलाई, आईटीआर तीन और आईटीआर चार के लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त है। ऑडिट मामलों के लिए 31 अक्टूबर अंतिम तिथि के साथ ही रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा को दो वर्ष से बढ़ाकर नए अधिनियम में चार वर्ष किया गया है। इसका लाभ आयकर दाताओं को मिलेगा।
-राधेश्याम गुप्ता, अधिवक्ता टैक्स एंड बार एसोसिएशन महराजगंज
-
नए अधिनियम में टीडीएस-टीसीएस की दर और सीमाओं को एक ही जगह समाहित किया गया है। इससे आयकर की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। करदाताओं को उनका लाभ स्पष्ट दिखेगा।
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-अजय कुमार, व्यापारी

कैपिटल गेन और वर्चुअल डिजिटल एसेट (क्रिप्टो) से जुड़े प्रावधान स्पष्ट होने से छोटे व्यापारियों के लिए प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन की सीमा इससे बढ़ेगी जिससे लाभ होगा।
-अजय राज कसौधन, प्रदेश मंत्री अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल
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