बसंतपुर गांव में रावण का पुतला बनाते नेवास अली व अन्य।
घुघली। घुघली विकासखंड के बसंतपुर गांव में आजादी के पहले से ही दशहरा मेला धूमधाम से लगता है, जिसमें रामलीला मंचन के बाद रावण का पुतला दहन भी होता है। यहां की सबसे खास बात यह है कि नेवास अली रावण का पुतला बनाते हैं।
उन्हें रावण का पुतला बनाने की कला विरासत में पिता बरकत अली से मिली है। वहीं जाकिर अली रामलीला मंचन के लिए राम लक्ष्मण को तैयार करते हैं।
निवास अली बताते हैं कि दशहरा करीब आते ही रात-दिन एककर रावण का पुतला बनाने में जुट जाते हैं। बसंतपुर ग्राम सभा के प्रधान प्रतिनिधि सिद्धार्थ सिंह का कहना है कि उनके गांव में रामलीला का मंचन अंग्रेजों की ओर से नामित मुखिया स्व. बृजकिशोर लाल ने शुरू कराया था। दमरी तिवारी रामलीला में रावण का किरदार निभाते थे। इस कारण वे दमरी तिवारी उर्फ रावण बाबा के नाम से प्रचलित हो गए थे।
डॉक्टर अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी यहां की रामलीला में रावण, अंगद सहित कई पात्रों का रोल निभाते हैं। शैलेश शर्मा बताते हैं कि सबसे बड़ी बात तो यह है कि यहां के रामलीला मंचन में कभी भी धर्म-मजहब आड़े नहीं आया।
दशहरे के दिन रावण के पुतला दहन के समय सामाजिक एकता इसी गांव में देखने को मिलती है। इसी क्रम में ग्राम सभा खानपुर में भी करीब 40 वर्षों से रावण का पुतला बनाकर जलाया जाता है। इस गांव में भी मुस्लिम हामिद की भूमिका मुख्य रूप से रहती है।