नेपाल के उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने 28 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर आयातित पैकेटबंद खाद्य पदार्थों और अन्य तैयार सामानों पर अधिकतम खुदरा मूल्य एमआरपी ब्रांड नाम तथा उपभोग की अंतिम तिथि अंकित करना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद 29 अप्रैल से बिना लेबल वाले सामानों की कस्टम क्लियरेंस रोक दी गई, जिससे सीमा पर ट्रकों की लंबी कतार लग गई।
नए नियम लागू होने के बाद कस्टम जांच और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया धीमी हो गई है। खासकर खाद्य सामग्री, एफएमसीजी और दैनिक उपयोग के सामान लेकर नेपाल जाने वाले ट्रकों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबी प्रतीक्षा, बढ़ते डीजल खर्च और समय पर डिलीवरी न होने से व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सीमा पर फंसे ट्रक चालकों के सामने भोजन, पानी और पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी संकट खड़ा हो गया है। भैरहवा-सोनौली सीमा क्षेत्र में अनिश्चितता और अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है।
व्यापारियों का कहना है कि अचानक लागू किए गए नियमों से भारत-नेपाल व्यापार और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों के बढ़ते दबाव के बाद नेपाल भंसार विभाग ने नियम में आंशिक राहत दी है। अब नेपाल के व्यापारियों को लिखित घोषणा पत्र देने और निजी वेयरहाउस में एमआरपी लगाने की शर्त पर वाहनों को पास किया जा रहा है, जिससे धीरे-धीरे ट्रकों की निकासी शुरू हुई है।
भैरहवा भंसार कार्यालय के प्रमुख हरिहर पौडेल ने बताया कि एमआरपी अनिवार्यता लागू होने के बाद कुछ दिनों तक वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही, लेकिन अब जांच और पासिंग प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है।