नाव पर बैठकर नदी से निकालते हैं बालू, किनारे पर एकत्र कर ट्राॅली पर लादकर ले जाते खरीदार
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में बालू खनन में माफिया की गहरी पैठ है। छोटी गंडक नदी को छलनी करने का खेल भोर में ही शुरू हो जाता है। सदर क्षेत्र में छोटी गंडक नदी का सीना खनन माफिया छलनी कर रहे हैं। बगैर परमिट माफिया अपने अवैध धंधे को बेरोक-टोक चला रहे हैं। दिन में एक-एक कर ट्राॅली से बालू लाकर डंप करते हैं, तो रात के अंधेरे में गाड़ियों का रेला लग जाता है। तेज रफ्तार गाड़ियों की जद में आने से हादसे की आशंका रहती है।
छोटी गंडक में मझौवा घाट से कोटिया घाट तक 10 किलोमीटर के दायरे में सफेद बालू का अवैध धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। खनन माफिया इस कदर जाल फैलाए हैं कि कार्रवाई के पहले ही उनको जानकारी हो जाती है। शुक्रवार को मझौवा घाट के पास नाव में कुछ लोग सवार होकर बालू निकाल रहे थे। किनारे पर कुछ लोग खड़े थे। आगे के रास्तों पर इनके नेटवर्क से जुड़े लोग हर किसी के आने-जाने पर नजर रख रहे थे। कोई भी अगर घाट की ओर आ रहा था तो उसके पीछे लग जाते थे। जब उनको यकीन हो जाता था कि इनसे कोई खतरा नहीं है, तो लौट जा रहे थे।
दोपहर में गाड़ियों पर बालू नहीं लादा जा रहा था। नदी से बालू निकालकर किनारे एकत्र किया जा रहा था। एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्राॅली आती दिखी। उसकी गति इतनी तेज रही की बाइक से एकदम करीब से होकर गुजरी। गनीमत रही कि बाइक सड़क से ज्यादा किनारे पर थी, नहीं तो हादसा हो जाता। बालू खनन स्थल पर करीब 25 से 30 की संख्या में लोग खड़े थे। सभी अपने-अपने हिसाब काम कर रहे थे। करीब 12 से 15 लोग अलग-अलग नाव में सवार होकर बालू निकाल रहे थे। शेष लोग लोकेशन जानने में जुटे रहे।
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प्रतिदिन 10 से बीस ट्राॅली बालू की होती है निकासी
दिन में खनन माफिया आसानी से बालू निकाल कर रखते हैं। प्रतिदिन 10 से बीस ट्राॅली बालू की निकासी होती है। 5 से 6 हजार रुपये प्रति ट्रॉली बालू बिकती है। राकेश, रोहित ने बताया कि अवैध बालू को खपाने में बिल्डिंग मैटेरियल के दुकानदार भी सहयोग करते हैं। इस बालू को कुशीनगर और बिहार का बताकर कभी-कभी ज्यादा रकम वसूल किया जाता है।
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घाट के बगल में झुरमुटों में हो रहा था भंडारण
शुक्रवार को मझौवा घाट पर माफिया बालू खनन कर झाड़ियों व निर्जन जगहों पर भंडारण कर रहे थे। दोपहर एक बज रहे थे। मौके पर मिले एक व्यक्ति ने बताया कि दिन में बालू एकत्र किया जाता है। मौका देखकर रात के समय में ट्राॅली में लाद कर गंतव्य पर पहुंचा दिया जाता है।
लोकेशन जानने में लगे रहते हैं खनन माफिया
खनन माफिया बालू लाद कर गंतव्य तक ले जाते हैं। रास्ते में कई जगह पर अपने आदमी बैठाए रहते हैं। वे लोग उनको पुलिस या अधिकारियों की लोकेशन देते रहते हैं। इस व्यवस्था से ट्राॅली पकड़ में नहीं आती है। लोकेशन देने के मामले में एक दिन पहले घुघली में खनन माफिया ने मारपीट कर ली थी।
बीट सिपाहियों से करते हैं सांठगांठ
सूत्रों की मानें तो खनन माफिया के नेटवर्क में बीट के सिपाही भी हैं। उनको बंधी रकम दी जाती है। धंधे में सबका हिस्सा समय से पहुंच जाता है। यही वजह है कि आराम से खनन होता है। कभी-कभार कार्रवाई होती है तो कुछ दिन बंद रहता है, फिर शुरू हो जाता है।
सुनसान जगहों पर बालू का भंडारण होता
मझौवा घाट, बैकुंठी घाट से होते हुए त्रिमोहानी, बाला क्षत्र घाट, कोटिया घाट से खनन कराया जाता है। सूत्र बताते हैं कि छोटी गंडक में मझौवा घाट, बैकुंठी घाट, घुघली बुजुर्ग, बिरैचा, बिरेईची, टेढवा, त्रिमुहानी, बाला क्षत्र घाट, कोटिया, केवटनिया सहित कई घाटों के पास सुनसान जगहों पर बालू का भंडारण होता है। लगभग तीन दर्जन गांवों की 10 हजार आबादी परेशान रहती है। नदी का जल स्तर नीचे चले जाने से सिंचाई में परेशानी होती है। बालू निकलने से गांव की ओर कटान बढ़ रहा है।
खनन विभाग की भूमिका अहम
जानकार बताते हैं कि इस तरह के इस खेल में अहम भूमिका खनन विभाग की होती है। विभाग की अनुमति के बिना यह संभव है नहीं। इसके लिए बाकायदा सरकारी सिस्टम से जुड़ा एक गिरोह काम करता है। एक कर्मी तय करता है कि कैसे और किसे परमिशन देनी है। इसके अलावा एक आदमी को परमिशन मिलते ही उसकी आड़ में तीन अन्य लोग जेसीबी से खनन कैसे करेंगे, यह भी वही तय करता है। फिर संबंधित विभागों को साधा जाता है।
समय-समय पर छापा मारा जाता है। अगर कहीं खनन हो रहा है तो टीम गठित कर कार्रवाई की जाएगी। किसी कीमत पर अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा। -मोहम्मद असद अंसरी, खनन अधिकारी