महराजगंज। सदर तहसील के तेंदुअहिया गांव में 55 एकड़ भूमि के मामला में भाकियू और पट्टा पाकर छिनने से प्रभावित किसान शुक्रवार 51वें दिन भी धरने पर रहे। मामले में गठित टीम अभी किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है और न ही पट्टा प्राप्त करने वाले प्रभावित किसानों का बयान लेने पहुंची।
पड़ताल में धरनारत पीड़ितों से बातचीत व मामले से जुड़े दस्तावेज खंगालने पर सामने आया कि मामला 55 एकड़ का नहीं बल्कि 200 एकड़ से संबंधित है और इन सभी जमीनों पर पावर ऑफ अटार्नी दस्तावेज के सहारे एक ही व्यक्ति काबिज है।
दीवानी न्यायालय महराजगंज के वरिष्ठ अधिवक्ता मो. अमीन ने प्रकरण में जानकारी देते हुए बताया कि महराजगंज पहले गोरखपुर का हिस्सा था जिसे 1989 में नया जिला घोषित किया गया। जनपद बनने से पहले यहां की भूमि संबंधित दस्तावेज गोरखपुर के अभिलेखागार में महफूज थे लेकिन जब जिला गठन के बाद भूमि संबंधित अभिलेख महराजगंज अभिलेखागार भेजे गए।
उस समय तैनात राजस्व व अभिलेखागार कर्मियों की संलिप्तता से अभिलेखों में बड़े पैमाने पर हेरफेर हुआ जिसकी बानगी वक्फ बोर्ड की मिल्कियत लोगों के नाम चढ़ने के मामले पिछले दिनों चर्चित रहे। इसी दौरान सदर तहसील के तेंदुअहिया, जरदी और लाला बड़हरा की जमीनों की मिल्कियत बदलने के उद्देश्य से दस्तावेजों में छेड़छाड़ व कूट रचना हुई।
अभिलेखागार में नहीं वाद के प्रपत्र
भूमि संबंधित मामले के जानकार दीवानी न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हमीदुल्लाह ने बताया कि इस प्रकरण की जांच लगभग डेढ़ वर्ष से चल रही है।
2025 में तत्कालीन एसडीएम ने जिला अभिलेखागार से उक्त वाद से संबंधित प्रपत्र मांगे जिस वाद के जिक्र से जमीन पर नाम चढ़ा तो 16 जनवरी 2025 को अभिलेखागार मुहर्रिर ने लिखित रिपोर्ट दी कि अभिलेखागार में इससे संबंधित कोई प्रपत्र नहीं हैं।