सोनौली
बॉर्डर के समीप व्यापार करने
वाले उद्यमी अब संकट में पड़
गए हैं। मधेसी आंदोलन के कारण
जहां व्यापार ठप है वहीं उद्यमी
अब पलायन करने के मूड में हैं।
व्यापार के आधार पर नेपाल के
लिए सोनौली प्रमुख बार्डर
है। सीमा से सटे रुपनदेही,
नवलपरासी, कपिलवस्तु
तथा भारत के महराजगंज,
सिद्धार्थनगर आदि
जिलों में उद्यमियों ने इकाइयां
स्थापित कर रखी हैं।
बीते तीन
महीनों से नेपाल में चल रहे
मधेसी आंदोलन के कारण सीमा
से सटे सभी फैक्ट्रियां बंद
हो चुकी हैं। यही हाल अन्य
सामानों का भी है। सोनौली
सीमा पर एक वाहन को नेपाल में
प्रवेश करने में कई दिन लग जा
रहे हैं। जिससे व्यापारियों
की कमर टूट जा रही है
भैरहवां
कस्टम अधिकारियों के अनुसार
भैरहवां कस्टम के अंतर्गत
शोहरतगढ़, खनुआ तथा
बढ़नी सीमा से प्रतिदिन दो
सौ से तीन सौ मालवाहक ट्रक
आसानी से पास होकर नेपाल के
भैरहवां बुटवल और काठमांडू
चले जा रहे हैं।
लेकिन सोनौली
सीमा से 20 दिनों से
मालवाहक की संख्या सौ भी पार
नहीं कर सका। उत्तर प्रदेश
के अन्य नेपाली सीमा रुपईडीहा,
नानपारा और लखीमपुर
खीरी से प्रतिदिन चार सौ से
पांच सौ मालवाहक ट्रक नेपाल
आसानी से आ जा रहे हैं।
व्यापारियों
का कहना है कि ऐसा ही रहा तो
सोनौली बॉर्डर से आने वाले
प्रमुख व्यापारियों का ट्रेड
समाप्त हो जाएगा।