समाज शास्त्र से एमए करने वाले कमलेश मौर्य कृषि शास्त्र में रमे
नौतनवां (महराजगंज)। समाज शास्त्र से पोस्ट ग्रेजुएट (एमए) करने के बाद खेती में रमने वाले महदेईया गांव के किसान कमलेश मौर्य की जिंदगी की गाड़ी आराम से चल रही है। कमलेश का कहना है कि दो एकड़ में बोड़ा की खेती करके वह साल में पांच से छह लाख रुपये कमा लेते हैं। बीते आठ साल से सब्जी की खेती करके वह आर्थिक समृद्धि की ओर अग्रसर हैं।
कमलेश बताते हैं कि वर्ष 2014 में समाज शास्त्र से एमए करने के बाद उन्होंने नौकरी करने की सोची ही नहीं। तय किया था कि आधुनिक तरीके से खेती करके जीविका चलाएंगे। कमलेश कहते हैं कि वह खेती में आधुनिक तौर-तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। उद्यान विभाग और कृषि विभाग से संपर्क में रह कर खेती से संबंधित नई-नई जानकारियां हासिल करते हैं। हाईस्कूल पास कमलेश की पत्नी सरस्वती देवी उनकी खेती के काम में भी मदद करती हैं। जरूरत पड़ने पर वह चार-पांच लोगों को रोजगार भी देते हैं। कमलेश बताते हैं कि शुरूआत में थोड़ी बहुत परेशानी हुई, लेकिन धीरे-धीरे सब ठीक हो गया। वैज्ञानिक ढंग से मौसमी सब्जियों की खेती करनी शुरू की तो सफल परिणाम सामने आए। उनका बेटा शुभम और शिवम नौतनवां के एक निजी स्कूल में कक्षा 6 और 5 में पढ़ते हैं।
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नेपाल के भैरहवा से लाते हैं बीज
कमलेश ने बताया कि बोड़ा की खेती में उत्पादन अधिक होता है। नेपाल के भैरहवा से बोड़ा का बीज लाता हूं। इस वर्ष 25,000 रुपये का बोड़ा का बीज लाकर दो एकड़ खेत में लगाया हूं। 80 रुपये प्रति किलो थोक में बिक रहा है। प्रतिदिन 3 से चार क्विंटल बोड़ा बिक जाता है। इससे 24 से 25 हजार तक की प्रतिदिन आय होती है। दो एकड़ बोड़ा की खेती में 90,000 रुपये की लागत आती है। इसमें 5 से 6 लाख रुपये सालाना आमदनी हो जाती है।
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खेत में आते हैं व्यापारी
कमलेश ने बताया कि सब्जी की फसल तैयार होने के बाद नौतनवां मंडी में उपज भेजते हैं। इसके अलावा सब्जी व्यवसायी खेत में आकर थोक भाव से सब्जी ले जाते हैं। नेपाल के भी सब्जी कारोबारी आते हैं। इस समय नेपाल के अलावा भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में बोड़े की मांग अधिक है।
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सब्जी की खेती से तरक्की
कमलेश मौर्य आठ वर्षों से सब्जी की खेती कर रहे हैं। इसी की आमदनी से अब तक एक एकड़ भूमि खरीदने के बाद मकान बनवा लिए हैं। बाइक और अन्य संसाधन की व्यवस्था कर बच्चों को बेहतर तरीके से शिक्षित कर रहे हैं।
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किसानों को नई तकनीक के बारे में समय-समय पर जानकारी दी जाती है। प्रदर्शनी एवं भ्रमण से बेहतर ढंग से खेती करने के बारे में बताया जाता है। विभाग की संचालित योजनाओं का लाभ किसानों को दिया जाता है।
- वीरेंद्र कुमार, जिला कृषि अधिकारी