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Maharajganj News: रोजा रख अमन-चैन की दुआएं मांग रहे नन्हें रोजेदार

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रोजा रखकर अल्लाह से गुनाहों की माफी मांग रहे नन्हें रोजेदार
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महराजगंज। रमजान का महीना तो रहमतों, बरकतों से भरा पड़ा है। बड़े, बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी दिन में रोजा रखकर कुरान शरीफ की तिलावत कर पांच वक्त की नमाज पढ़ते हैं। इस साल सिंदुरिया थाना क्षेत्र के चार नन्हें बच्चे कड़ी धूप के बावजूद रोजा रखकर अल्लाह से अमन-चैन की दुआएं मांग रहे हैं।
आठ वर्षीय सुहेल अली का मंगलवार को रमजान महीने का चौदहवा रोजा का चल रहा है। सुहेल का कहना है कि अल्लाह अपने मानने वालों की समय-समय पर परीक्षा लेता है। रोजेदार के लिए रोजा रखना कड़े इम्तहान कम नहीं है।
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दस वर्षीया शहनाज का कहना है कि रमजान के सभी रोजे रख रही हूं। भूख-प्यास लगने पर कुरान शरीफ पढ़ती हूं। अल्लाह से माफी की दुआ मांगती हूं। परिवार के सदस्यों के साथ रोजा-इफ्तार एवं शहरी करती हूं। पांच वक्त का नमाज बड़े पाबंदी के साथ पढ़ती हूं और अपने गुनाहों की अल्लाह से माफी मांगती हूं।
पहली बार रोजा रख रही आठ वर्षीया नूरशबा का कहना है कि मैंने अभी तक सभी रोजे रखे हैं। रोजा इस्लाम धर्म के पांच बुनियादी ढांचों में से एक है। रोजा रखना हर मुसलमान के लिए फर्ज है। रमजान के महीने में परिवार के लोगों के साथ रोजा रखकर पांच वक्त की नमाज पढ़ रही हूं।
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दस वर्षीया रोजेदार नूर आयशा खातून पहली बार रमजान का रोजा रख रही है। उसका कहना है रमजान का महीना बड़ा ही बरकत वाला महीना है। अल्लाह एक नेकी के बदले सत्तर नेकियों का पुण्य देता है। रमजान के महीने में रोजा रखती हूं, कुरान शरीफ की तिलावत (पढ़ती) करती हूंं।
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