भिटौली। पिपरपाती तिवारी में श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक बालेंदु शेखर शुक्ल ने पूतना उद्धार की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि मथुरा का अत्याचारी राजा कंस जब यह सुनता है कि देवकी का आठवां पुत्र ही उसके वध का कारण बनेगा तो वह भय और क्रोध से भर उठता है।
वह अनेक राक्षसों को गोकुल में जन्मे शिशुओं की हत्या के लिए भेजता है। उन्हीं में से एक थी भयंकर राक्षसी पूतना। वह रूप बदलने में निपुण थी। एक दिन वह अत्यंत सुंदर स्त्री का रूप धारण कर गोकुल पहुंची। उसके चेहरे पर ममता का मुखौटा था, किंतु हृदय में घोर विष भरा हुआ था। गोकुल की सरल गोपियां उसकी मायावी छवि से मोहित हो गईं। पूतना सीधे नंदभवन में गई, जहां कृष्ण शैया पर लेटे थे। उसने अपने स्तनों पर विष लगाकर बालक को गोद में उठा लिया ताकि दूध के साथ ही वह प्राणहर विष भी पिला दे। कृष्ण ने उसे पहचान लिया और उसका उद्धार कर दिया।