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Maharajganj News: भूस्खलन से काठमांडो मार्ग बंद, सोनौली में 17 किमी लंबा जाम

Sun, 27 Sep 2026 01:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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- कृष्णभीर में भारी मलबा सड़क पर आने से यातायात रोका गया, चार दिन से सीमा पर खड़े हैं ट्रक
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- फल-सब्जी की खेप पोखरा के रास्ते भेजी गई
सोनौली। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश से भारत-नेपाल सड़क संपर्क फिर प्रभावित हो गया है। कृष्णभीर के पास भूस्खलन के बाद सड़क पर भारी मलबा आने से नारायणगढ़-मुगलिंग-काठमांडो मार्ग बंद कर दिया गया। इसका असर सोनौली सीमा पर भी पड़ा और भारतीय क्षेत्र में करीब 17 किलोमीटर तक मालवाहक वाहनों की कतार लग गई। इससे नेपाल जाने वाले यात्रियों के साथ माल परिवहन भी प्रभावित हुआ है।
कृष्णभीर में भूस्खलन के बाद बीच रास्ते फंसे वाहनों को एक-एक कर निकाला गया। इसके बाद अग्रिम आदेश तक मार्ग पर आवागमन रोक दिया गया। काठमांडो जाने वाले मालवाहक ट्रकों को भैरहवा में रोक दिया गया है। नेपाल भंसार संघ के पूर्व अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद धिमिरे ने बताया कि रास्ता सामान्य होने के बाद ही वाहनों को आगे रवाना किया जाएगा। फल, सब्जी और अन्य जरूरी सामान को पोखरा मार्ग से भेजा गया है।
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कई हिस्सों में भूस्खलन और जलभराव

लगातार बारिश से नारायणगढ़, मुगलिंग, नागढुंगा और दाउन्ने क्षेत्र में भी सड़क संपर्क प्रभावित है। चितवन के डीएम गणेश अर्याल ने मार्ग पर आवागमन रोके जाने की जानकारी दी है। पिछले माह कृष्णभीर में क्षतिग्रस्त सड़क के ऊपर वैकल्पिक ट्रैक बनाकर यातायात शुरू कराया गया था, लेकिन दोबारा भूस्खलन से परेशानी खड़ी हो गई।


पर्यटन कारोबार पर भी असर

सोनौली-काठमांडो मार्ग बंद होने से नेपाल जाने वाले पर्यटकों की मुश्किल बढ़ गई है। सोनौली से काठमांडो, पोखरा सहित अन्य पर्यटन स्थलों के लिए बड़ी संख्या में लोग जाते हैं। पर्यटन कारोबारी केशव जोशी ने बताया कि सड़क लंबे समय तक बंद रहने पर होटल, टैक्सी, ढाबे और सीमा क्षेत्र के छोटे कारोबार प्रभावित होते हैं।
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चार दिन से बॉर्डर पर अटके ट्रक

ट्रक चालकों राम सूरत, दिलीप कुमार और बब्बन सिंह ने बताया कि वे चार दिन से सोनौली बॉर्डर पर फंसे हैं। मार्ग बंद होने से माल की डिलीवरी का समय तय नहीं है। ट्रांसपोर्ट संचालक आदिल के अनुसार पहाड़ी रास्ते में बार-बार व्यवधान से परिवहन का पूरा शेड्यूल बिगड़ जाता है। सड़क खुलने के बाद भी कतार में खड़े वाहनों को निकलने में कई दिन लग सकते हैं।
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