बिस्मिल नगर वॉर्ड में बाइक को बनाया गया जुगाड गाड़ी।
महराजगंज। शहर में 25 से 30 की संख्या में जुगाड़ वाहन संचालित हो रहे हैं। इनका पंजीकरण, बीमा और साइलेंसर नहीं है। प्रदूषण का प्रमाण पत्र भी नहीं है। सड़क पर न तो कोई इन्हें रोकता है और न ही चेक करता है। सिस्टम पर भारी जुगाड़ वाहन शहर में फर्राटा भर यातायात नियमों का माखौल उड़ा रहे हैं।
शहर की सड़कों पर पुराने स्कूटर व बाइक या फिर उसके इंजन से बनाए गए माल वाहक वाहनों की भरमार है। जिले में ऐसे वाहनों की संख्या पिछले कुछ महीनों में बढ़ गई है। इनमें से अधिकांश इंजन का प्रयोग कर गन्ने की पेराई में करते हैं। इन वाहनों में आगे के हिस्से में बाइक जबकि पीछे के हिस्से में ठेला लगा होता है। कुछ दुकानदारों ने तो अपने कर्मचारियों को जुगाड़ वाहन बनवाकर दे रखे हैं।
जुगाड़ वाहन सड़कों पर बिना किसी फिटनेस के चलाए जा रहे हैं। समय पर इनके ब्रेक भी सही तरीके से लग जाएंगे इसका कोई भरोसा नहीं हैं। वातावरण को प्रदूषित कर रहे इन वाहनों में 15 से 20 साल पुराने खटारा स्कूटरों या मोटर साइकिलों के इंजन लगाए जाते हैं। एक जुगाड़ वाहन एक लीटर ईंधन में 25 से 30 किलोमीटर चलता है। देहात क्षेत्रों में पंपिंग सेट का इंजन फिट कर जुगाड़ तैयार किए जा रहे हैं। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी विनय कुमार ने बताया कि जिले में अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।