इंडो नेपाल बॉर्डर की सोनौली सीमा।
महराजगंज/सोनौली। सोनौली बाॅर्डर पर पकड़े गए ईरानी नागरिक नौ माह से देश में अलग-अलग स्थानों पर रह रहे थे, लेकिन अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। नेपाल पहुंचने की उनकी योजना को सुरक्षा एजेंसियों ने फेल कर दिया। उनके वीजा की अवधि समाप्त हो चुकी थी। वे वियतनाम होकर अपने देश जाना चाहते थे।
शुक्रवार देर रात भारत-नेपाल सीमा सोनौली बॉर्डर पर पकड़े गए ईरानी नागरिक 13 मार्च 2023 को एक साथ दिल्ली पहुंचे थे। कुछ को 15 दिन भारत में रहने की अनुमति थी, तो कुछ को एक माह, लेकिन सोनौली बॉर्डर पर पकड़ा गया ईरानी परिवार भारत में नौ माह से दिल्ली और आगरा में स्थान बदल-बदल कर रह रहा था। उन्हें शुक्रवार देर रात सोनौली सीमा पर अवैध रूप से नेपाल जाने के दौरान पुलिस ने पकड़ लिया। वह काठमांडो जा रहे थे। फिर वहां से वियतनाम फिर ईरान जाने का इरादा था।
पुलिस एवं खुफिया विभाग की पूछताछ में पता चला कि सिरौस रहिमिजादेह टूरिस्ट बीजा पर 13 मार्च 2023 को, घडंखैर एघबल्जादेह, असल मलएरी निवासी अल्बर, शाहरूख मलएरी निवासी गोहर्दश्त 6 मार्च को भारत आए थे। नाएब मोघोल और सज्जाब मघोल निवासी तेहरान नौ मार्च को टूरिस्ट वीजा पर भारत आए था। 29 दिसंबर 2023 सोनौली आब्रजन कार्यालय की फर्जी मुहर लगाकर नेपाल जाने की कोशिश करते हुए पकड़े गए। जबकि आब्रजन कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि उक्त सभी ईरानी नागरिक सोनौली आब्रजन विभाग पर पहुंचे ही नहीं थे। अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों का चालान कर दिया गया है।
यूएनएचसीआर इंडिया का दस्तावेज भारत में रहने के लिए मान्य नहीं
जांच में पता चला कि उक्त नागरिक में किसी को 30 दिन किसी को पंद्रह दिन रहने की अनुमति थी। साथ ही इन लोगों के पास (यूएनएचसीआर) का एक दस्तावेज मिला है। इसमें बताया गया है कि यह लोग यूएनएचसीआर इंडिया में एसाइलम सीकर के रूप में रजिस्टर्ड हैं और उनका रिफ्यूजी स्टेट्स विचाराधीन है। जबकि यह यूएनएचसीआर इंडिया का दस्तावेज भारत में रहने के लिए मान्य नहीं है। पूछताछ में उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली और आगरा में नौ माह के दौरान कई बार जगह बदलते रहे। पुलिस ने विदेशी अधिनियम 1946 के तहत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।