तीन दिन पहले मौसम का मिजाज बिगड़ा तो सूरज भी बादलों की ओट में छिप गया। तेज पछुआ हवाओं के चलने से गलन बढ़ गई। इस दौरान न्यूनतम ही नहीं अधिकतम तापमान में भी गिरावट जारी रही। ठंड से जनजीवन अस्त व्यस्त है। जिला अस्पताल में निमोनिया के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।
देर से ही सही मौसम के करवट बदलने से किसान में फसलों को लेकर खुशी है लेकिन ठंड उन्हें खेतों तक पहुंचने में परेशानी पैदा कर रही है। लोग आज का काम कल तक मौसम के सही होने पर टाल रहे हैं। सड़कों व बाजारों में आम दिनों की तरह रौनक नहीं है। रोडवेज की बसों का हाल भी बुरा है।
जो बसें दस से पंद्रह मिनट में भर जाती थीं। उन्हें सवारियों के इंतजार में आधे घंटे से लेकर एक एक घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। लगन होने के बावजूद बाजार व कपड़े की दुकानों पर सन्नाटा है। दुकानदारों का कहना है कि मौसम सही होने के बाद ही बाजारों में रौनक लौटेगी।
नगरपालिका की ओर से कुछ जगहों पर अलाव की व्यवस्था की गई है लेकिन वह भी काफी नहीं है। दो से तीन सौ रुपये प्रतिदिन कमाने वाले रिक्शा चालक सवारी नहीं मिलने से परेशान हैं। बहुत जरूरी होने पर ही लोग कार्यालय अथवा घरों से बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा संकट दिहाड़ी मजदूरों के सामने है। उन्हें काम ही नहीं मिल पा रहा है।