परतावल बाजार में 50 लाख से अधिक का कारोबार, गाजीपुर से पहुंची बकरों की खेप, कुल 130 हुई बिक्री
महराजगंज। ईद उल अजहा का चांद बुधवार को नजर आ गया। सात जून को बकरीद मनाई जाएगी। तीन दिन कुर्बानी का सिलसिला चलेगा। त्योहार से पहले परतावल के आखिरी बाजार में बकरों की खरीद फरोख्त बड़े पैमाने पर हुई। महज तीन घंटे में 50 लाख से अधिक का कारोबार हुआ। खरीदारों ने वजन को दरकिनार कर सुंदर बकरों के लिए मुंह मांगी कीमत देने से परहेज नहीं किया। सबसे महंगा बकरा 1.89 लाख रुपये में बिका, जिसे कप्तानगंज के रईस अहमद ने खरीदा। बकरा महराजगंज नगर पालिका निवासी एहसान कुरैशी का था।
महराजगंज जनपद के बकरे आसपास के जिलों तक मशहूर हैं। जिले में वन क्षेत्र की अधिकता के चलते ग्रामीण बकरी पालन एक कुटीर उद्योग की तरह करते हैं। पशु चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इनक संख्या 2.50 लाख से अधिक है, जिन्हें ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने पाल रखा है। परतावल की मंडी बकरों की बिक्री बड़े पैमाने पर करने के लिए गोरखपुर, कुशीनगर तक चर्चित है। बृहस्पतिवार को त्योहार से पहले परतावल का आखिरी बाजार लगा, जिसमें खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। कप्तानगंज, रामकोला, चौरीचौरा तक से खरीदार कुर्बानी के लिए बकरा पसंद करते दिखे। बाजार में कुल 27 बकरों की बिक्री एक लाख रुपये प्रति की दर से की गई। व्यापारी गाजीपुर से 40 बकरे मंडी में लेकर आए थे, जिसे 40-50 हजार प्रति बकरे के हिसाब से बेचा। 62 बकरे 50 हजार की रेंज में बिके। जनपद के व्यापारी शरीफ कुरैशी ने बताया कि 13 बकरे उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों से खरीदकर बाजार की डिमांड के मुताबिक मंगाया था। सभी बकरे 40 हजार की रेंज के आसपास बिके। लगभग 10 हजार रुपये से अधिक का मुनाफा हुआ। दोपहर 11 बजे तक बाजार में चहल-पहल रही और लगभग 130 से अधिक बकरे बिके।
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कुर्बानी में सुंदरता का महत्व-
सिविल लाइन स्थित मदरसा रिजविया नूरुल उलूम के सदर मौलाना इमरानुल्लाह ने बताया कि बकरीद में अल्लाह ने पैगंबर इब्राहिम से अपने सबसे प्यारी चीज मांगी थी। पैगंंबर अपने प्यारे बेटे इस्माईल को कुर्बान करने के लिए चल पड़े। इस्माइल बड़ी मिन्नतों और मुरादों के बाद पैदा हुए थे। यह ऐतिहासिक घटना है। यहीं से बकरीद की शुरुआत हुई जो आज भी जारी है। इसमें सुंदरता का महत्व है, इसलिए ऐसे बकरे कुर्बानी के लिए खरीदने की प्रथा है जो दिखने में सुंदर हो।