इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट का 70 फीसदी कार्य पूरा, मार्च 2027 तय है मियाद
महराजगंज/खनुआ। अप्रैल 2027 से अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर की सोनौली सीमा पर 400 करोड़ की लागत से 114 एकड़ भूमि पर इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट (आईसीपी) का निर्माण कराया जा रहा है। मार्च 2027 में इसके पूरा होने के बाद सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद हो जाएगी।
जानकारी के अनुसार, बीते सप्ताह डीएम गौरव सिंह सोगरवाल ने इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट का निरीक्षण करते हुए तय समयसीमा के भीतर निर्माण पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया था। इसके बाद भूमि पत्तन प्राधिकरण ने तेजी दिखाते हुए लगभग 70 फीसदी कार्य पूर्ण कर लिया है। आईसीपी निर्माण के लिए मार्च 2027 की समय सीमा पहले से निर्धारित है। इसका निर्माण पूर्ण होने के बाद न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर की सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि व्यापार को भी बूस्टर डोज मिलेगा।
जनपद के भारत-नेपाल सीमा सोनौली में लगभग 400 करोड़ की लागत से 114 एकड़ जमीन पर आधुनिक व डिजिटल इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट निर्माण किया जा रहा है। पिछले दिनों डीएम ने निरीक्षण कर निर्माण की प्रगति का जायजा लेते हुए मानकों की जांच की। कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों ने बताया कि यह निर्माण तीन फेज में होना है और इसकी डेडलाइन मार्च 2027 निर्धारित है।
जिम्मेदारों के अनुसार पहले चारण का कार्य हर हाल में अक्तूबर से पहले पूरा कर लिया जाना है। लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बताया कि फेज वन में 74 फीसदी कार्य की भौतिक प्रगति हो चुकी है फेज टू में कार्गो टर्मिनल और कार्गो पार्किंग बनेगी। इसकी 44 फीसदी प्रगति पूरी हो चुकी है।
फेज तीन में जो प्रक्रिया है वह टेंडर के बाद शुरू हो जाएगी। फेज वन में कार्गो बिल्डिंग के साथ-साथ लॉजिस्टिक सुविधाएं मिलेंगी। इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट बनने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापारिक वाणिज्यिक आवागमन और आयात निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही दूसरी तरफ विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां संदिग्धों पर नजर भी रख सकेंगी।
बदलेगी डेमोग्राफी, सुधरेगी पहचान
इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के निर्माण के बाद बॉर्डर इलाके की तस्वीर बदल जाएगी। सोनौली कस्बा नेपाल के भैरहवा से सटा सबसे व्यस्त बॉर्डर है। यहां से होकर हर दिन हजारों मालवाहक ट्रक, पर्यटक व बौद्ध अनुयायी गुजरते हैं। चेक पोस्ट उनकी सुरक्षा को मजबूत करेगा। लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक इससे कुल छह सुविधाएं बढ़ेंगी।
- बॉर्डर क्रॉस करने में सामान जांच के लिए अलग-अलग विभागों के पास जाना पड़ता है। आईसीपी में कस्टम, इमिग्रेशन, बैंक, वेयरहाउस, क्वारंटीन सब एक ही छत के नीचे होंगे। इससे ट्रकों का समय 6-8 घंटे से घटकर 1-2 घंटे रह जाएगा। नेपाल और भारत के बीच होने वाले तिलहन, लोहा, सीमेंट, कृषि उत्पादों का व्यापार आसान होगा।
- लुंबिनी, कपिलवस्तु और गोरखपुर के भारतीय और नेपाली पर्यटकों के लिए अलग इमिग्रेशन काउंटर, वेटिंग हॉल, टॉयलेट और पार्किंग प्रबंध से भीड़ नियंत्रित रहेगी।
- सीसीटीवी स्कैनर, कार्गो स्कैनिंग के लिए चौबीस घंटों तक सुरक्षा बलों की तैनाती होगी। इससे तस्करी, नकली नोट और अवैध आवाजाही पर रोक लगेगी। एकीकृत कमांड सेंटर भी प्रस्तावित।
- निर्माण के बाद हजारों लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। होटल, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक और खाने-पीने के कारोबार के साथ जिले का राजस्व बढ़ेगा।
- आईसीपी परिसर में कोल्ड स्टोरेज, बैंक, बीमा, कूरियर, रेस्टोरेंट और ड्राइवरों के लिए रेस्ट रूम जैसी सुविधाएं होंगी।
- सोनौली गोरखपुर-भैरहवा औद्योगिक कॉरिडोर का गेटवे है। बेहतर कनेक्टिविटी से दोनों देशों के बीच व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी सहयोग और गहरा होगा।
वर्जन
सोनौली में इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट निर्माण कार्य का पिछले दिनों निरीक्षण किया गया। कार्य मानक अनुरूप व समयबद्ध तरीके से करवाया जा रहा है। कार्यदायी संस्था को तय समय के भीतर कार्य समाप्त करने का निर्देश दिया गया है।
-गौरव सिंह सोगरवाल, डीएम महराजगंज।