महराजगंज। सीमावर्ती क्षेत्रों में तमाम ऐसे लोग हैं, जो चंद दिनों में ही अमीर बन गए। उनके काम धंधे क्या हैं, इस पर खुफिया एजेंसियों की नजर है।
कई व्यक्ति ऐसे हैं जो गुजरे जमाने में ठेले पर चाउमीन, मजदूरी समेत छोटे-मोटे काम करते थे। अब करोड़ों के मालिक बन गए हैं। उनके पास आलीशान घर, महंगी कारें हैं। इन धन कुबेरों की कुंडली खंगाली जा रही है। सीमावर्ती इलाकों में नवधनाढ्यों की आमदनी तेजी से कैसे बढ़ रही है। इसकी जानकारी खुफिया एजेंसियां एकत्र कर रही हैं।
भारत-नेपाल के 84 किलोमीटर की खुली सीमाएं एक दूसरे से मिलती हैं। बॉर्डर से सटे ही गांव एवं नगर दोनों हैं। सरहद के भारतीय क्षेत्र में नगर पालिका और नगर पंचायत के साथ करीब दो ब्लाॅक और 200 गांव है।
नगर के साथ ग्रामीण क्षेत्र में अचानक अमीर हुए लोगों पर खुफिया एजेंसियों की नजर है। यहां के 39 नवधनाढ्यों को चिह्नित किया गया है। इनमें कपड़ा, नशीली दवाएं, मुद्रा परिवर्तन के अलावा कुछ ट्रांसपोर्ट और क्लियरिंग एजेंट हैं। इन सभी का आयकर विभाग की मदद लेकर कुंडली तैयार की जा रही है।
सरहद के संदिग्ध मामलों पर सीधे नजर रखी जा रही है। इसको लेकर बीते सप्ताह नौतनवा स्थित एक अवैध मनी एक्सचेंज कारोबारी के घर ईडी ने छापा डाला था।
सूत्रों की माने ताे अब अन्य कारोबारी ईडी के रडार पर हैं। भारत-नेपाल सीमा पर वह धनकुबेर के रूप में चिह्नित होने लगे हैं। ऐसे नवधनाढ्य कुछ वर्ष पहले दिहाड़ी मजदूर थे। अब आलीशान बंगलों के मालिक हो गए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों से लेकर महानगरों में उनकी बड़ी-बड़ी कोठियां बनी हुई हैं। इनके हाथ कुबेर का खजाना कैसे लगा इसकी जांच शुरू है।
करीब 12 माह पूर्व एक सूची तैयार की गई, इसमें 39 ऐसे संदिग्धों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने बगैर किसी ठोस काम किए अचानक से अकूत संपत्ति अर्जित कर ली। इसमें क्या हुआ और विभाग ने क्या किया अभी यह सामने नहीं आ पाया है।