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Maharajganj News: मानवीय संवेदनाओं को बचाने की जद्दोजहद कर रही हिंदी कविता

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ग्राम स्वराज पुस्तकालय रामपुर बुजुर्ग में हुआ आयोजन
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आज की कविता के समक्ष संप्रेषणीयता सबसे बड़ी चुनौती : प्रो. अमरनाथ
महाराजगंज। आज की हिंदी कविता अपने समय के गहन यथार्थ, संघर्ष और चुनौतियों को मुखरता से अभिव्यक्त कर रही है। हिंदी कविता रूमानी दुनिया से निकलकर महानगरों की यांत्रिकता, पलायन और बाजारवाद के बीच मानवीय संवेदनाओं को बचाने की जद्दोजहद कर रही है। कविता, गीत और गजल वर्तमान समय में एक विमर्श खड़ी कर रही है।
उक्त विचार ग्राम स्वराज पुस्तकालय रामपुर बुजुर्ग में आयोजित आज की ''हिंदी कविता: यथार्थ और चुनौतियां'' विषयक व्याख्यान को संबोधित करते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के हिंदी विभाग के विभाग अध्यक्ष एवं गजलकार प्रोफेसर वशिष्ठ अनूप ने व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक विषमता, पलायन, निम्न और मध्यवर्ग की आर्थिक पीड़ा आज की कविताओं में प्रमुखता से उभर रही है। वहीं भाषा की जटिलता से आम पाठक और श्रोताओं से संवाद टूट रहा है। काव्य संध्या के क्रम में प्रोफेसर वशिष्ठ अनूप ने अपने गजलों के माध्यम से सभी को प्रभावित किया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रोफेसर वशिष्ठ अनूप किताबों या पन्नों तक सीमित नहीं हैं। वह जनमानस के मन मस्तिष्क पर हावी होने वाली कविताएं लिखते हैं। चिकित्सक एवं गजलकार डॉ. ठाकुर भारत श्रीवास्तव ने कहा कि साहित्य व समाज का गहरा रिश्ता है। कोलकाता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे प्रोफेसर अमरनाथ ने कहा कि आज की कविता के समक्ष संप्रेषणीयता का संकट एक बड़ी चुनौती है। व्याख्यान और काव्य संध्या का संचालन डॉ. शांतिशरण मिश्र ने किया।
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काव्य संध्या में लेखक एवं गीतकार हरि शरण ओझा, गजलकार डॉ. ठाकुर भरत श्रीवास्तव, डॉ. परशुराम गुप्त, नवीन शुक्ला, राजेश स्वर्णकार, संतोष श्रीवास्तव, युवा कवि दिव्यांश पांडेय, उमेश साहनी, शशि वर्मा, सुरेंद्र पटेल, आशीष गौतम, रानू प्रजापति मौजूद रहे।
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