महराजगंज। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में हाई-रिस्क गर्भवतियों को अब इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। अभी तक खून की कमी या अन्य जटिलताओं के मामले में गर्भवतियों को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ता था। मरीजों को लाने-ले जाने में समय और अन्य तरह की परेशानी होती थी। लेकिन जल्द ही लोगाें को इन दिक्कतों से छुटकारा मिलेगा।
जानकारी के अनुसार, जिले में वर्तमान में कुल 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक नगरीय पीएचसी संचालित हैं। इसमें संस्थागत प्रसव की व्यवस्था पहले से है लेकिन हाई-रिस्क गर्भवतियों के लिए पर्याप्त प्रबंधन नहीं था। खून की कमी, उच्च रक्तचाप, शुगर या अन्य जटिलताओं की स्थिति में मरीजों को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ता था। इससे न केवल गर्भवती महिलाओं को आने-जाने में परेशानी होती थी बल्कि कई बार विलंब के कारण उनकी स्थिति गंभीर भी हो जाती थी।
शासन के निर्देश पर अब विभाग की ओर से प्रत्येक पीएचसी पर एनीमिया कक्ष की स्थापना की जाएगी। जहां हाई-रिस्क श्रेणी में आने वाली गर्भवतियों को तत्काल जांच और उपचार की सुविधा दी जाएगी। इस व्यवस्था के बाद डॉक्टर स्थानीय स्तर पर ही खून की जांच, आवश्यक दवाओं की आपूर्ति और आवश्यकतानुसार आयरन या अन्य जरूरी उपचार तुरंत कर सकेंगे।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हर महीने दो बार एचआरपी डे मनाया जाता है।
इस दिन गर्भवतियों की जांच की जाती है। औसतन प्रत्येक केंद्र पर 25 से 30 गर्भवती जांच के लिए आती हैं। इनमें से कई महिलाएं खून की कमी या अन्य कारणों से हाई-रिस्क की श्रेणी में आती हैं।
पहले इन मरीजों का उपचार जिला अस्पताल में ही संभव था लेकिन अब एनीमिया कक्ष बनने से उन्हें उसी दिन उसी केंद्र पर इलाज मिल सकेगा।