जिले में जगह-जगह आयोजित हुए कार्यक्रम
महराजगंज। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस (मई दिवस) के अवसर पर शुक्रवार को जिले में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित हुए। साथ ही नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसका उद्देश्य श्रमिक वर्ग के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना तथा उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना रहा।
चौक बाजार और खुटहां बाजार प्रतिनिधियों के अनुसार,
पकड़ी रेंज वन विश्राम भवन में आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का संचालन पकड़ी रेंज के वनक्षेत्राधिकारी तथा केएमसी मेडिकल कॉलेज के अनुभवी चिकित्सकों की टीम ने संयुक्त रूप से किया।
शिविर में क्षेत्र के श्रमिकों एवं स्थानीय नागरिकों को विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। शिविर में भारी संख्या में लोगों ने पहुंचकर सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण, ब्लड प्रेशर, शुगर जांच समेत अन्य चिकित्सीय सुविधाओं का लाभ उठाया। चिकित्सकों ने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श दिए। साथ ही लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम एवं स्वच्छता बनाए रखने के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
पकड़ी वनक्षेत्राधिकारी सुशांत मणि त्रिपाठी ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य श्रमिक वर्ग के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना रहा। इस अवसर पर वन दरोगा विपुल कुमार मिश्रा, वन रक्षक विक्रांत सिंह, वन्यजीव रक्षक शशि चौधरी एवं डॉ देव, डॉ हेमंत भारद्वाज, डॉ. अमान खान, डॉ. रूपाली यादव सहित तमाम ग्रामीण मौजूद रहे।
श्रमिक दिवस पर भी काम करते रहे
खनुआ। नौतनवा तहसील क्षेत्र के तमाम गांवों और राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रमिक कार्य करते दिखे। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर उन्होंने अपनी बातें साझा की। जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर भी श्रमिक दो जून की रोटी जुटाने की जद्दोजहद में पड़े रहे। हरदीडाली, खनुआ गांव तथा नौतनवा कस्बे के अनेक वाॅर्डों में काम करते हुए पाए गए। साथ ही गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी सड़क चौड़ीकरण में तमाम मजदूर काम करते हुए दिखे, जिसमें से कुछ लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। सीतापुर के मोहित, सुमित और राजस्थान के कन्हैया और आगरा के लोकेश इत्यादि ने बताया कि हम लोग राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना में काम कर रहे हैं। हमें रोज 500 रुपये मजदूरी के रूप में मिलता है। उसी में हम लोगों का खाना-पीना, रहना सबकुछ है। अब क्या किया जाए। पेट पालने के लिए काम तो करना ही पड़ेगा। श्रमिकों ने बताया कि बीमार होने पर मालिक दवा कराते हैं। इलाज में आया खर्च हमारी मजदूरी से काट लिया जाता है।