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जीएसटी फर्जीवाड़ा : 11 फर्मों के जरिये सरकार को पहुंचाई गई थी राजस्व की क्षति

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आरोपियों पर हो सकती है गैंगस्टर की कार्रवाई, तैयारी में पुलिस
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जीएसटी बिल के फर्जीवाड़े में चार आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
पुलिस की जांच में उजागर हुआ फर्जी फर्मों का मामला
संतकबीरनगर। जीएसटी बिल फर्जीवाड़ा मामले में पुलिस की जांच में बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। अब तक की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने 11 फर्जी फर्मों के जरिये करोड़ों रुपये का फर्जी लेनदेन दिखाकर सरकार को भारी राजस्व क्षति पहुंचाई। मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि पुलिस अब पूरे गिरोह की गतिविधियों की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की भी तैयारी की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक वर्ष 2025 में राज्य कर विभाग की जांच में फर्जी एनवॉइस और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का खेल सामने आया था। आरोप है कि अस्तित्वहीन फर्मों के नाम पर जीएसटी पंजीकरण कराकर बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के करोड़ों रुपये के बिल तैयार किए गए। इन्हीं के आधार पर विभिन्न फर्मों को फर्जी आईटीसी का लाभ दिलाया गया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ।
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जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र से संचालित हो रहा था। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्मों का पंजीकरण कराने, फर्जी ई-वे बिल और एनवॉइस तैयार करने तथा जीएसटी रिटर्न दाखिल करने का पूरा तंत्र विकसित किया गया था। वास्तविक कारोबारी प्रतिष्ठानों को फर्जी बिल उपलब्ध कराकर टैक्स देनदारी कम कराने का काम किया जाता था।
मामले में पहले संदीप कुमार और अमन उपाध्याय को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं दो जून को पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने दिल्ली से 50-50 हजार रुपये के इनामी सौरभ अग्रवाल उर्फ सन्नी और अजीत कुमार को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों से मिले डाटा की जांच की जा रही है, जिससे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

आरोपियों से मिले साक्ष्य का पुलिस कर रही परीक्षण
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अब तक की जांच में 11 फर्मों के माध्यम से फर्जी कारोबार किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। आरोपियों से मिले साक्ष्य का पुलिस टीम परीक्षणकर रही है। गिरोह के सदस्यों के बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और जीएसटी दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में संगठित अपराध के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।
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मामले की विवेचना जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-संदीप कुमार मीना, एसपी
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