कपड़ा कारोबारी रियाज का नहीं लग पा रहा सुराग
लक्ष्मीपुर ब्लाक क्षेत्र के एक मौलाना पर भी संदेह
21 अगस्त को कन्नौज में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर कार में मिला था 10 करोड़ का सोना
महराजगंज। कन्नौज में एक कार में करीब 10 करोड़ का सोना मिलने के मामले में बड़े रैकेट की सक्रियता के संकेत मिले हैं। पकड़े गए भारतीय व नेपाली नागरिक से पूछताछ के अनुसार यह रैकेट नेपाल से महराजगंज जनपद से होते हुए पूरे देश में फैला हुआ है। मंगलवार की देर शाम यह मामला डीआरआई (डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस) को सुपुर्द कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, कन्नौज में 10 करोड़ का सोना पकड़े जाने के मामल में शुरुआती जांच में बड़ी मछलियों व कई सफेदपोश चेहरों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। सोनौली कस्टम अधीक्षक सुधीर त्यागी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सोना तस्करी में एक बड़ा सिंडिकेट शामिल है। इसके नेटवर्क सोनौली से लेकर दिल्ली तक फैले हैं। यह बड़ा मामला है इसलिए जांच कस्टम की केंद्रीय जांच शाखा को मंगलवार हैंडओवर कर दिया गया। यह विंग वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले सेंट्रल सीमा शुल्क बोर्ड भारत सरकार के अधीन है। कस्टम विभाग ने दस्तावेजों की सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
21 अगस्त की रात कन्नौज में कार संग संदीप व नेपाल के पाल्पा के सरोज सोने की ईंट के साथ पकड़े गए। इनसे पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर कस्टम की राज्य स्तरीय टीम सोनौली में डेरा डाले हुए थी। सोना तस्करी सिंडिकेट में कपड़ा व्यापारी ठूठीबारी निवासी रियाज की गिरफ्तारी के बाद आठ से 10 बार कस्टम, पुलिस व एसएसबी ने दबिश दी लेकिन रियाज का कोई सुराग नहीं मिला।
कस्टम की जांच में उक्त कार के नेपाल आने-जाने का रिकॉर्ड खंगालने के दौरान पाया गया कि ठूठीबारी के महेशपुर बॉर्डर से उक्त कार सुबह 09:36 बजे 600 नेपाली रुपये में भंसार चुकाकर नेपाल गई थी। सात घंटे बाद कार इसी बॉर्डर से लौटी। इसके बाद यह कार गोरखपुर पहुंची। गोरखपुर से संदीप इसके साथ संतकबीरनगर, बस्ती, अयोध्या, बाराबंकी होते हुए कर निकला। टोल से इसकी पुष्टि भी हो चुकी है। जांच एजेंसियों ने सोने के स्रोत, दिल्ली पहुंचाने वाले नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की जांच के दौरान इसे बड़ा मामला पाया।
लक्ष्मीपुर निवासी एक मौलाना पर भी संदेह
शुरुआती जांच में जुटी टीम को महराजगंज के लक्ष्मीपुर के एक मौलाना के संबंध में भी अहम जानकारी हाथ लगी है। संदिग्ध की गतिविधि ट्रैक करने के लिए लोकल इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है। लोकल इंटेलिजेंस का मानना है कि उक्त मौलाना बांग्लादेश का मूल निवासी है लेकिन उसने अपनी नागरिकता छिपाकर भारतीय दस्तावेज बनवा रखे हैं। मौलाना फर्जी आईडी पर प्री एक्टीवेटेड सिम सोना तस्करी नेटवर्क को उपलब्ध कराता था। संदीप जायसवाल के डिलीट व्हाट्सएप चैट की रिकवरी से मौलाना के संदर्भ में जानकारी मिली है।
वर्जन
सोना तस्करों का यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय है। दुबई, हांगकांग, मलेशिया से सोना भारत पहुंचाने के लिए नेपाल का उपयोग ट्रांजिट रूट के तौर पर किया जा रहा था। यह बड़ा सिंडिकेट है ऐसे में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मंगलवार यह मामला डीआरआई को सौंप दिया गया है।
-सुधीर त्यागी, कस्टम अधीक्षक, सोनौली, महराजगंज।