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फर्जीवाड़ा : एक मजदूर एक ही समय...काम हुआ कई जगह

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मजदूरों की संख्या अधिक दिखाकर सरकारी धन के बंदरबांट का मामला
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चकरोड के मिट्टी भराई में जिम्मेदारों ने अधिक दिखा दी मजदूरों की संख्या
महराजगंज। सिसवा ब्लॉक के शिकारपुर गांव में मनरेगा के काम में धांधली सामने आई है। प्रकरण को लेकर प्रशासन की सख्ती से हड़कंप मच गया है। डीएम के निर्देश पर जांच में सामने आया है कि काम के दौरान मजदूरों की संख्या अधिक दिखाई गई। मामले में ग्राम सचिव को निलंबित कर रोजगार सेवक को सेवा समाप्ति का नोटिस दिया गया है। साथ ही ग्राम प्रधान को पंचायती राज अधिनियम की धारा 95(जी) के तहत नोटिस जारी किया गया है। मामले का खुलासा होने के बाद जिम्मेदारों की मुश्किल बढ़ गई है।
शिकारपुर गांव में चकरोड के मिट्टी भराई में मजदूरों की संख्या में झोल किया गया है। पोर्टल पर दर्ज मजदूरों की संख्या और मौके पर काम करने वाले मजदूरों की संख्या में काफी अंतर मिला है। सबसे हैरानी की बात है कि कई लोगों एक दिन में अलग अलग कार्योx में लगाया गया। जांच में तथ्य सामने आया की जिन लोगों का नाम दिखाया गया है। उनमें ज्यादातर ऐसे नाम हैं, जो एक ही व्यक्ति एक समय में अलग अलग कार्यो को कर रहे हैं। ऐसे में इस बात की पुष्टि हो रही है की हाजिरी लगाने में धांधली की गई है। जानकार बतातें हैं कि अगर मस्टरोल की संख्या अधिक है तो निश्चित रूप से धांधली होती है। संख्या कम होने पर धांधली की आशंका कम रहती है। मनरेगा के हाजिरी पोर्टल पर तमाम ऐसे गांव हैं, जहां मस्टरोल की अधिक संख्या में दिखाया जाता है।
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सूत्र बताते हैं कि मजदूरों की संख्या अधिक दिखाया जाता है लेकिन मिट्टी भरने के मानक पर ध्यान नहीं दिया जाता है। जबकि प्रति श्रमिक मिट्टी भरने के मानक तय हैं। कागजों में मजदूरों की संख्या में गड़बड़ी करने की कहानी कोई नई बात नहीं है। ऐसा अक्सर होता रहता है। इस प्रकरण में पोल खुलने के बाद पूरी कारस्तानी सामने आती है। यही गड़बड़ी करके असल मजदूरों के हक को छिना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि मजदूरों के नाम में गड़बड़ी कर हाजिरी पूरी की जाती है। ऐसे लोगों का नाम को भरा जाता है जो विरोध न करें। ग्राम स्तर पर जिम्मेदार अपने चहेतों के नाम हाजिरी दर्ज कर सरकारी रकम की बंदरबांट करने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि धांधली जल्दी सामने नहीं आती है। क्योंकि, सब कुछ ऐसे किया जाता है जिससे रकम आसानी से मिल जाए। जिनके नाम को दर्ज किया जाता है, असल में वें काम नहीं करते हैं। इस वजह से विरोध जल्दी सामने नहीं आता है। यही कारण है कि असल में काम करने वाले इधर-उधर भटकने को विवश हैं। योजना के लाभ से पात्र वंचित हो जाते हैं।
वर्जन

मामला संज्ञान में आते ही जांच की गई। प्रकरण में सख्त कार्रवाई की जा रही है। पात्रों को हर हाल में योजना का लाभ देने का प्रयास जारी है।
-महेंद्र कुमार सिंह, सीडीओ
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