चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात। यह कहावत जिले के अंतिम छोर पर बसे सोहगीबरवा पर सटीक बैठती है। आजादी के सात दशक बीतने के बाद फरवरी 2020 में विद्युत विभाग ने सोहगीबरवा में विद्युत आपूर्ति शुरू की थी। अक्तूबर में आई बाढ़ से दर्जनों विद्युत पोल क्षतिग्रस्त हो गए। जिसे दुरुस्त कराने के लिए आज तक जिम्मेदारों ने जरूरत नहीं समझी। करीब साढ़े तीन वर्ष से सोहगीबरवा के लोग मोमबत्ती के सहारे रहने को मजबूर हैं।
विद्युत विभाग के कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, जिले के अंतिम छोर पर बसे सोहगीबरवा में निवास करने वाले करीब 40 हजार लोगों को उजाले में रखने के लिए 2015-16 में दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत गांव में विद्युत पोल और तार लगाए गए थे। 2018-19 में विद्युत कर्मियों की ओर से सौभाग्य योजना के तहत सैकड़ों उपभोक्ताओं का विद्युत कनेक्शन भी किया गया।
सोहगीबरवा निवासी जोगी पटेल ने कहा कि विद्युत विभाग की ओर से फरवरी 2020 में पहली बार विद्युत आपूर्ति शुरू की गई थी, लेकिन अक्तूबर महीने में आई बाढ़ के चलते दर्जनों विद्युत पोल क्षतिग्रस्त हो गए। उसके बाद से अब तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है।
पूर्व ग्राम प्रधान विनय सिंह ने कहा कि आजादी के सात दशक बाद गांव में बिजली आई थी वह भी आपदा की भेंट चढ़ गई। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि व जिला पदाधिकारी को ध्यान देना चाहिए।
राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार की हर घर बिजली योजना विफल साबित हो रही है। बिजली नहीं रहने के कारण शाम होते ही पूरा गांव अंधेरे में तब्दील हो जाता है। राजेश गुप्ता ने कहा कि जिले के अंतिम छोर पर बसे गांव के लोग सूर्यास्त होते ही लालटेन युग में चले जाते हैं।
40 हजार आबादी को बिजली का इंतजार
निचलौल विकास खंड क्षेत्र के गांव सोहगीबरवा, शिकारपुर, भोतहा सहित सात टोले बसही, मटियरिया, धर्मपुर, नौका टोला, बाबू टोला, मरचहवा, मुजा टोला के अलावा कुशीनगर जिले के चार गांव के करीब 40 हजार आबादी को आज भी बिजली का इंतजार है।
यहां के निवासी ब्रह्मा यादव, राम सवारे निषाद, गोलू आदि का कहना है कि पिछले करीब साढ़े तीन वर्ष से ग्रामवासी अंधेरे में रह रहे हैं। नदियों और जंगलों से घिरे क्षेत्र के लोग गर्मी, बरसात और ठंड में अंधेरे में रात काटने को मजबूर हैं।
विनोद श्रीवास्तव, रामदरश कुशवाहा आदि ने कहा कि गंडक नदी के किनारे और चारों तरफ जंगलों से घिरे इस टापू को बिजली से रोशन करने के लिए करीब ढाई हजार विद्युत कनेक्शन किया गया है। फिर भी लोग अंधेरी रात में जीने को विवश है।
जबकि बगैर विद्युत आपूर्ति किए ही विद्युत विभाग के जिम्मेदारों की ओर से समय समय पर बिजली बिल जमा करने का फरमान भी जारी किया जाता है।
सोहगीबरवा में स्ट्रीट लाइट की मरम्मत के नाम पर हुआ था खेल
निचलौल विकास खंड क्षेत्र के सोहगीबरवा गांव में स्ट्रीट लाइट की मरम्मत कराने के नाम पर जिम्मेदारों ने खूब खेल किया था। जिम्मेदारों ने बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट की बगैर मरम्मत कराए ही रकम का भुगतान करा लिया था। ग्रामीण अयूब अली, बृजलाल मुसहर आदि ने 16 मई 2022 को खंड विकास अधिकारी को दिए शिकायत के कहा था कि जिम्मेदारों की मनमानी के चलते रात में गांव की सड़कों पर अंधेरा छाया रहता है।
गांव को उजाले में रखने के लिए 125 स्ट्रीट लाइट की मरम्मत के लिए 72 हजार रुपये का भुगतान 18 नवंबर वर्ष 2021 को ही करा लिया गया था। लेकिन स्ट्रीट लाइट की मरम्मत नहीं कराई गई।