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Maharajganj News: मछलियों पर फार्मलिन का लेप...सेहत न हो जाए खराब

Mon, 05 May 2025 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज। अगर आप मछली खाने के शौकीन हैं तो सावधान हो जाइए। शहर में आंध्रप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल से मछलियां आती हैं। इन्हें ताजा रखने के लिए फार्मलिन का लेप चढ़ाया जा रहा है। यह सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है।
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शहर में रोजाना 30 क्विंटल बर्फ वाली मछली की खपत है। सहालग में यह बढ़कर एक टन हो जाती है। शहर में बलिया नाले के पास मछली मंडी है। यहीं पर स्थानीय मछलियों के अलावा बाहर से मछलियां मंगाई जाती हैं। अधिकतर मछली दुकानों पर देखा जाता है कि बर्फ के अंदर मछलियां रखी जाती हैं।
मछली कारोबारियों ने बताया कि आंध्र प्रदेश और सुदूर राज्यों से मंगाई जाने वाली मछलियां बर्फ के सहारे ही शहर पहुंचती हैं। मछलियों को फार्मलिन रसायन के घोल में पहले नहलाया जाता है। इसके बाद इन्हें थर्मोकोल में बर्फ के साथ रख दिया जाता है, ताकि जल्दी खराब न हो। इस तरह कुछ मछली कारोबारी मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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ये बर्फ युक्त मछलियां सेहत को नुकसान पहुंचा सकती हैं। बर्फ वाली मछलियों का रेट भी सस्ता होता है। दिखने में मछलियों को यह अंदाजा लगाना मुश्किल रहता है कि ये बर्फ वाली हैं। इसे ही ताजा बताकर धंधेबाज मोटा मुनाफा कमाकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। शहर की मछली मंडी में बर्फ वाली मछली रोहू, बिगेट, भाकुर, बैकर, पापलेट मछली अधिक आती है।
जानकारों के अनुसार, केमिकल लगी मछली को करीब तीन माह तक ताजा रखा जा सकता हैं। इससे कारोबारियों को नुकसान होने का खतरा कम रहता है। वहीं दूसरी ओर इन मछलियों का सेवन करने से सेहत खराब हो सकती है। सहालग में बढ़ती मांग को देखते हुए कारोबारी इसकी तैयारी पहले ही कर लेते हैं। मांग के हिसाब से मछलियां मंगाकर रख लेते हैं।
मछली विक्रेता रमेश साहनी, बृजलाल सहनी, राम मिलन साहनी ने बताया कि ग्राहकों की सेहत का ख्याल रखा जाता है। चंद लोगों की वजह से ईमानदारी से कारोबार करने वाले बदनाम होते हैं। स्थानीय मछलियों को लाकर बेचा जाता है। अपने फायदे के लिए लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाना ठीक नहीं है। सूत्रों की माने तो केमिकल युक्त बर्फ वाली मछलियां ज्यादातर नेपाल भेजी जाती हैं।
किडनी हो सकती है खराब

निचलौल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात वरिष्ठ डॉ. शांति विजय मिश्रा ने बताया कि बर्फ के अंदर रखी गईं मछली खाने से किडनी तेजी से खराब होती है। इतना ही नहीं किडनी के साथ ही शरीर के विभिन्न अंगों पर भी इसका गलत असर पड़ता है। फार्मलिन एक खतरनाक हानिकारक रसायन है। यह शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके सेवन से लीवर के साथ ही किडनी समेत कई महत्वपूर्ण अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
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बर्फ वाली मछली का रेट
रोहू 150 से लेकर 160 रुपये प्रति किलो
ब्रिगेड 150 से लेकर 160 रुपये प्रति किलो
भाकुर 150 से 160 रुपये प्रति किलो
बैकर 130 रुपये प्रति किलो
तालाब की जिंदा मछली
रोहू 300 रुपये प्रति किलो
भाकुर 300 रुपये प्रति किलो
ब्रिगेड सिल्वर 200 से 220 रुपये प्रति किलो
पापुलर 160 से 180 रुपये प्रति किलो
नैनी 180 रुपये प्रति किलो
ग्रास 220 रुपये प्रति किलो
चाइना 220 से लेकर 240 प्रति किलो
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