पुरानी पेंशन बंद किए जाने के विरोध में शुक्रवार को विशिष्ट बीटीसी व अन्य शिक्षकों ने हाथ में काली पट्टी बांध कर काला दिवस मनाया। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम को दिया। बीएसए आफिस से लेकर जिला मुख्यालय तक बाइक जुलूस निकाला। संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. गिरीन्द्रनाथ मिश्र ने कहा कि पुरानी पेंशन हम शिक्षकों का अधिकार है तथा हम अपने संघर्षों के दम पर इसे लेकर रहेंगे।
महामंत्री गोपाल पासवान ने कहा कि पुरानी पेंशन व्यवस्था के सरकारी नौकरी का कोई महत्व नहीं है। जब प्रतिनिधियों को पुरानी पेंशन देय है तो 62 वर्ष तक सेवा देने वाले शिक्षकों को क्यों नहीं। संगठन के उपाध्यक्ष सतीश कुमार गोयल ने कहा कि सरकार यदि बुढ़ापे की लाठी छिनती है तो यह उनके लिए आत्मघाती होगा।
पीएम व सीएम को भेजे पत्र में शिक्षकों ने लिखा है कि पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा व केरल की सरकारों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था को जारी रखी है तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं। प्रदेेश में भी यह व्यवस्था होनी चाहिए। इस दौरान उपाध्यक्ष मनोज मिश्रा, व्रजेन्द्र पटेल, पूरनचंद गुप्त, पवन कुमार शुक्ल, ऋषिकेश के अलावा तमाम शिक्षक शामिल रहे।
दूसरी अाेर नवनियुक्त प्राथमिक शिक्षकों की बैठक शुक्रवार को ब्लॉक परिसर में हुई। शिक्षकों के वेतन व एरियर भुगतान एवं अन्य समस्याओं को लेकर चर्चा की गई और आंदोलन की रणनीति तैयार की गई। शिक्षक नेता राजकुमार सिंह ने कहा कि शिक्षकों के वेतन व एरियर भुगतान सहित कई समस्याओं के संबंध में 18 मार्च को डीएम एवं बीएसए को पत्र दिया था। महज 572 लोगों के वेतन व एरियर भुगतान का आदेश किया गया।
जिसके एवज में मनमाने तौर पर सुविधा शुल्क की वसूली की गई। जिन शिक्षकों ने सुविधा शुल्क नहीं दिया उनके भुगतान की प्रक्रिया आज तक शुरू नहीं की गई। चेतावनी दी कि डीएम एवं बीएसए द्वारा तत्काल इस मसले पर कार्रवाई नही की जाती है। तो सभी शिक्षक चार अप्रैल को जिलाधिकारी को पत्र देंगे। तत्काल समाधान नहीं होने पर बीएसए कार्यालय पर आमरण अनशन करेंगें। अतुल सिंह व विश्वनाथ प्रसाद ने नवनियुक्त शिक्षकों से उपस्थित होकर और आंदोलन को सफल बनाने की अपील की। शशंाक तिवारी, विमलेश राय, अजय त्रिपाठी, वेद प्रकाश , प्रदीप, विजय आदि रहे।