बुधवार की रात करीब आठ बजे तक गंडक नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। प्रशासन की निगरानी में ग्रामीण अलर्ट हैं और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो गुरुवार को सोहगीबरवा से लेकर झुलनीपुर क्षेत्र तक बाढ़ का असर बढ़ने की आशंका है। सोहगीबरवा क्षेत्र के शिकारपुर, कटवासी, दवनहवा, भोथहा, कुंडहवा और मुंजा टोला सहित कई गांव बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्र में हैं। इन गांवों के करीब 2200 परिवारों के प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिवार के साथ पशुओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की है। पशुपालक परिवारों के एक सदस्य को पशुओं की देखरेख के लिए ऊंचे स्थान पर रुकना पड़ सकता है, जबकि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी की जा रही है।
ऊंचे स्थानों पर बनाए गए शरण केंद्र
सोहगीबरवा में बाबू टोला, बाजार टोला और मंदिर टोला को ऊंचा स्थान मानते हुए शरण केंद्र बनाए गए हैं। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पिछली बाढ़ के दौरान थाना परिसर के आसपास भी पानी भर गया था। ऐसे में इन शरण केंद्रों की क्षमता और सुरक्षा को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। नौरंगिया बिहार क्षेत्र करीब तीन किलोमीटर दूर है। वहीं रोहुआ नाला भी उफान पर है, जिसे पार करना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इससे आवागमन प्रभावित होने की आशंका है।
प्रशासन ने पहले से ही कर रखा है नाव का इंतजाम
बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने रोहुआ नाला पर पहले से ही नाव की व्यवस्था कर दी है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में इसी नाव के माध्यम से ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारी है। प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी किए जाने के बाद ग्रामीण कपड़े, खाद्यान्न और जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर रखने लगे हैं।
सायरन से ग्रामीणों को किया जा रहा सतर्क
बुधवार सुबह से ही प्रशासन प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में पूरी तरह सतर्क रहा। गांव के जिम्मेदार लोगों की ओर से अलर्ट सायरन बजाकर ग्रामीणों को लगातार सूचना दी जा रही है। लेखपाल अवधेश सिंह और सोहगीबरवा थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार सिंह मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को सावधानी बरतने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। पुलिस टीम भी गांवों में पहुंचकर लोगों को सतर्क कर रही है।
अचानक आई बाढ़ से सुरक्षित स्थान पर जाना मुश्किल
ग्रामीणों का कहना है कि अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में पशुओं को छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाना मुश्किल होगा। रात में जलस्तर बढ़ने पर निचले इलाकों से लोगों को निकालना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ग्रामीणों ने पर्याप्त नाव, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, भोजन और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने की मांग की है।