महराजगंज/ निचलौल। थाना क्षेत्र के बजहा उर्फ अहिरौली गांव के राजी टोला निवासी पांच बहनों का इकलौता भाई कोहरे के कहर से सदा के लिए आंखों से ओझल हो गया। वहीं रिश्तेदारी की दो महिलाओं का सुहाग उजड़ गया।
यह सड़क हादसा शनिवार देर रात में निचलौल से घर लौटते समय बहुआर रोड स्थित वन देवी माता मंदिर के पास हुआ। हादसे में कार सवार तीनों युवकों की मौत हो गई। रविवार सुबह हादसे की खबर गांव में मिलते ही मातम छा गया। गांव के अधिकांश घरों में चूल्हे नहीं जले। बजहा उर्फ अहिरौली गांव के राजी टोला निवासी रामानंद गुप्ता की पांच बेटियां पूनम, चंद्रकला, रेनू, मीना और रीना से घने कोहरे ने इकलौते भाई राजेश को छीन लिया। इतना ही नहीं राजेश के घर रिश्तेदारी में कुशीनगर जिले से आए युवक देवानंद और शोभित की मौत से दोनों की पत्नियों के सुहाग भी उजड़ गए। तीनों युवक एक कार में सवार होकर निचलौल से घर की ओर लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि राजेश पांच बहनों का इकलौता भाई था, जिसके चलते पांचों बहनें भाई राजेश को काफी प्यार और दुलार करती थीं।
राजेश दो बहनों से छोटा और तीन बहनों से बड़ा था। वहीं राजेश के पिता रामानंद की आर्थिक हालत कुछ ठीक नहीं है। इसके चलते वह अक्सर विदेश जाकर मजदूरी करते हैं। उन्होंने तीन बड़ी बेटियों की शादी कर हाथ भी पीले कर दिए थे। अब बेटे राजेश की शादी कुशीनगर जिले के रामकोला में तय थी। 27 जनवरी को राजेश की सगाई होनी थी। 20 फरवरी को दूल्हा बनकर शादी रचाने वाला था।
राजेश की मां मंजू देवी बेटियों के साथ मिलकर घर में शादी की तैयारी में जुटी थीं। वहींं बेटे की शादी के लिए पिता रामानंद भी 20 जनवरी को घर पहुंचने वाले थे, लेकिन शायद ईश्वर को यह सब मंजूर नहीं था, क्योंकि विदेश से पिता रामानंद को घर पहुंचने और माथे पर सेहरा सजने से पहले राजेश की अर्थी सज गई। इस हादसे ने लोगों की आंखें नम करने के साथ ही झकझोर कर रख दिया है। हर व्यक्ति बिलखते परिजनों को देख इस हादसे को कोस रहा था। लेकिन अनहोनी के आगे सभी विवश थे।
धुआं उगलते वाहनों से प्रदूषण का खतरा : जिले में सड़कों पर करीब 20,000 से अधिक कंडम गाड़ियां दौड़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार इस पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। नियम के अनुसार 15 साल से अधिक अवधि की गाड़ियों के चलन पर रोक है। इसमें ज्यादातर बाइक शामिल है। जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में बिना परमिट और कंडम वाहनों का उपयोग हो रहा है। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है। धुआं उगलते हुए वाहनों से प्रदूषण का खतरा भी बढ़ गया है। समय सीमा पूरी हो चुकी गाड़ियों के सभी प्रपत्र भी पूरे नहीं होते हैं। इससे कुछ तो जुगाड़ गाड़ी बनवाकर काम चला रहे हैं।