राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में एक करोड़ तक जुर्माना और संपत्ति कुर्की का भी किया गया है प्रावधान
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में शुचिता निर्धारण के लिए शासन ने डीआईओएस की शक्तियां बढ़ा दी हैं। अब अगर नकल गिरोह की सक्रियता मिलती है तो डीआईओएस नकल निवारण अधिनियम की जगह राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत प्राथमिकी दर्ज करा सकेंगे। इसके तहत एक करोड़ रुपये का जुर्माना व संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन इस अभियोग की सिफारिश करने से पहले परिषद सचिव को अवगत कराना होगा।
18 फरवरी से शुरू हो रही यूपी बोर्ड की परीक्षा के लिए जिले में 104 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के 70,701 परीक्षार्थी इसमें शामिल होंगे। हालांकि जनपद में कभी नकल गिरोह की गतिविधि नहीं मिली है लेकिन नकल माफिया पर नकेल कसने के लिए इसका प्रावधान किया गया है। किसी केंद्र पर नकल करते मिलने पर सिर्फ विद्यार्थी पर ही नहीं बल्कि केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक और बाहरी तत्वों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। डीआईओएस कार्यालय को मिले पत्र में कहा गया है कि परीक्षा केंद्र पर नकल की पुष्टि पर केवल परीक्षा निरस्त करने या छात्र को दंडित करना पर्याप्त नहीं। नकल के पीछे काम कर रहे संगठित गिरोह को तोड़ना लक्ष्य है ताकि विष्य में कोई परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ न कर सके।
वर्जन
परीक्षा अवधि में कानून-व्यवस्था, गोपनीयता और पारदर्शिता को इस बार काफी सख्ती बरती जाएगी। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का प्रावधान भी बोर्ड ने किया है। ताकि परीक्षी की शुचिता पर किसी तरह की आंच न आने पाए।
-प्रदीप कुमार शर्मा, डीआईओएस।