सर्दी, जुकाम, बुखार व दर्द से कराह रहे बढैपुरवा गांव के लोग
गांव में नहीं हुई सभी लोगों की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
निचलौल। विकास खंड क्षेत्र के बढैपुरवा गांव में बीते 20 दिनों में छह लोगों की मौत के बाद ग्रामीण इन दिनों खुद सतर्कता बरतते हुए कोरोना संक्रमण से बचाव कर रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा गांव में सभी लोगों की जांच नहीं की गई। निगरानी समिति की बैठक भी नहीं हुई। हालांकि गांव में सर्दी, जुखाम और बुखार से काफी लोग पीड़ित हैं। स्वयं निजी डॉक्टर या झोला छाप से दवा लेकर घर में हैं। दर्द से कराह रहे मरीजों की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। ग्राम प्रधान ने पूरे गांव को सैनिटाइज कराकर लोगों से कोविड गाइड लाइन पालन करने की अपील की।
भारत-नेपाल सीमा से सटे बढैपुरवा गांव के पड़ताल में पता चला है कि इन दिनों ज्यादातर लोग सर्दी, जुखाम और बुखार से पीड़ित हैं। लोग काढे़ आदि का सेवन कर अपना बचाव कर रहे हैं।
बढैपुरवा निवासी मोदीन, चुन्नू, अहमद, बदरी, इमरान, पूमा ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र का यह गांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निचलौल से करीब सात किलोमीटर उत्तर दिशा में है। गांव की आबादी 1800 के करीब है। गांव में 20 दिनों से छह लोगों की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो चुकी है, जिनकी कोरोना जांच नहीं हुई थी। इनका आरोप है कि जिम्मेदारों द्वारा गांव में अभी तक जांच कैम्प नहीं लगा है और न ही निगरानी समिति की बैठक हुई है। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण लोग अपनी जान बचाने के लिए खुद सतर्कता बरत रहे हैं। गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। कुछ दिन पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच कर लोगों ने कोरोना संक्रमण की जांच कराई थी, जिस दौरान दो लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। वे दोनों कोरोना से जंग जीतकर अब पूरी तरह से सुरक्षित हो चुके हैं।
ग्राम प्रधान हुस्ना खातून ने कहा कि ग्राम सभा में कोविड-19 के दृष्टिगत गाइडलाइन का पालन कराने के लिए लोगों से अपील की जा रही है। पूरे ग्राम सभा में सैनिटाइजेशन कराया गया है। साथ ही गांव में जांच कैंप लगवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम से बात की गई है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेश द्विवेदी ने कहा कि टीम द्वारा हर गांव में क्रमवार जांच कैम्प लगाकर लोगों की जांच की जा रही है। संक्रमित मिलने पर उन्हें होम क्वारंटीन कर दवा देकर देख रेख की जा रही है। वहीं अन्य लोगों को भी कोरोना संक्रमण से बचने के लिए जागरूक किया जा रहा है।