फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maharajganj News: काले जादू के लिए पूजन भंडार पर वन्य जीवों के अंग बिकने की आशंका

सार

निचलौल में त्योहारों के दौरान पूजन और आयुर्वेदिक दुकानों पर वन्य जीवों के अंग बिकने का मामला सामने आया है। वन विभाग ने छापेमारी कर संदिग्ध वस्तुएं बरामद कीं। इससे अवैध शिकार और व्यापार को बढ़ावा मिलने की आशंका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

निचलौल। काले जादू के लिए पूजन भंडार पर वन्य जीवों के अंग बेचने का मामला सामने आया है। क्योंकि वन कर्मियों की टीम 25 सितंबर को शहर स्थित पूजन भंडार और आयुर्वेदिक भंडार की दुकान पर छापा मारा था। इस दौरान जहां पूजन की दुकान से प्लास्टिक की हत्था जोड़ी बरामद हुई थी। वहीं आयुर्वेदिक दुकान से कई प्रकार की संदिग्ध वस्तु बरामद की गई।
विज्ञापन

ऐसे में कई प्रकार की आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं। त्योहार आते ही काले जादू और सिद्धि प्राप्ति के लिए ऐसे दुकानों पर प्रतिबंधित वन्य जीव के अंग बेचे जा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक दशहरा और दिवाली पर काले जादू और सिद्धि प्राप्त करने के लिए हथाजोड़ी, कोडी, सियार सिंग, बिल्ली जैर और मोर पंख सहित कई वन्य जीव के अंग की जरूरत पड़ती है। ऐसे में त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से वन्यजीवों का अवैध धंधा भी बढ़ जाता है। इससे दुकानों पर उनके अंग मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
विज्ञापन

समाजशास्त्री राजन आर्या के मुताबिक त्योहारों के दौरान पूजा सामग्री बेचने वाली दुकानों पर वन्यजीवों के हिस्सों की मौजूदगी की आशंका चिंता का विषय है। जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अवैध हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कुछ धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में ऐसे हिस्सों का उपयोग किया जाता है। भले ही वे प्रतिबंधित हों। इससे अवैध शिकार और वन्यजीवों के व्यापार को बढ़ावा मिलता है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
वहीं वन क्षेत्राधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि लोगों में वन्यजीव संरक्षण अधिनियमों और उनके नियमों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। वन्यजीवों के हिस्सों का व्यापार और बिक्री भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत एक दंडनीय अपराध है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें