पराली जलाने पर 15 किसानों पर जुर्माना
महराजगंज। जिले में धान की कटाई के बाद पराली जलाने वाले किसानों को चिह्नित कर एफआईआर दर्ज कराने और जुर्माना वसूलने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। इसी क्रम में निचलौल, फरेंदा, नौतनवां एवं सदर तहसील के 15 किसानों पर पराली जलाने पर जुर्माना लगाया गया है।
उपकृषि निदेशक डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि धान की कटाई के बाद पराली न जलाने के लिए जिले के किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसके बाद भी कुछ किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे। ऐसे किसानों पर कार्रवाई की जा रही है। निचलौल तहसील के सिरौली निवासी मारकंडेय एवं रामचंदर पर पांच-पांच हजार, बैकुंठपुर के केशव कुमार, सिरौली के तारा प्रसाद, बंदी के राममिलन, फरेंदा तहसील के बोकवा गांव के चिन्नू, मनोज, दुर्गेश, कलावती, असुरैना के कोईल, सदर तहसील के ग्राम सभा नटवां के बलराम और कुइयां कंचनपुर के व्यासमुनी पर 2500-2500 रुपये जुर्माना लगाया है। इसी क्रम में फरेंदा तहसील क्षेत्र के भैसहिया गांव के रामलाल, झामट गांव के युसुफ एवं बोदई पर 1500-1500 रुपये जुर्माना लगाया गया है।
सदर तहसीलदार मोहम्मद जसीम ने बताया पराली जलाने से वायू प्रदूषण बढ़ने और खेत की उत्पादन क्षमता कम होने की आशंका रहती है। क्षेत्र में लगातार भ्रमण किया जा रहा है। लेखपाल और पुलिस टीम भी लगी है जिससे किसानों को पराली जलाने से रोका जा सके।
शासन का फरमान बेसर, धड़ल्ले से जल रही पराली
महराजगंज। पराली या कूड़ा करकट जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। सरकार ने इस मसले पर गंभीर रुख अख्तियार करते हुए जुर्माना लगाने के साथ एफआईआर तक दर्ज करने के आदेश दिए हैं। बावजूद इसके जिले में धड़ल्ले से कूड़ा ही नहीं पराली भी जलाया जा रहा है। सोमवार को भी लेहड़ा बाजार के पास खेत में पराली और फरेंदा बुजुर्ग गांव में कूड़ा जलाया जा रहा था।
जिले में बड़े पैमाने पर धान और गन्ने की खेती होती है। इस समय धान की कटाई चल रही है। बड़े किसान धान की कटाई मशीन से कराते हैं। कटाई के बाद जो अवशेष बचता है, उसे जमा करने के बजाय खेत में ही जला देते हैं। जानकार बताते हैं कि ऐसा करने से पर्यावरण को तो नुकसान पहुंचता ही है, भूमि में मौजूद पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। किसान मित्र कहे जाने वाले केंचुएं भी नष्ट हो जाते हैं। आसपास के पौधों को भी क्षति पहुंचती है। गौनरिया राजा गांव के किसान दिनेश चंद पांडेय ने बताया कि पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी मिली है। अब इसे खेत में छोड़कर सड़ाया जाएगा। गिदहा गांव के सुदामा पटेल का कहना था कि अब पराली को खेत में ही छोड़ना पडे़गा।
उपकृषि निदेशक डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि पराली जलाने से पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत की कमी तो आती ही है, इसके जहरीला धुएं से कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी गैसों से आसमान में धुंध बन जाती है। इससे आंख और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है। इन्हीं सबके चलते प्रदेश सरकार ने धान के पुआल और गन्ने के अवशेषों को खेतों में जलाने पर रोक लगा रखी है।
धान के बचे हुए हिस्से को कहते हैं पराली
पराली धान के बचे हुए उस हिस्से को कहते हैं जिसकी जड़ें धरती में होती हैं। किसान धान की फसल पकने के बाद उसका ऊपरी हिस्सा काट लेते हैं क्योंकि वही काम का होता है। बाकी का जो हिस्सा काम का नहीं होता, उसे वह जला देते हैं ताकि अगली फसल बोने के लिए खेत खाली किया जा सके।
महराजगंज जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 174 है। इसमें बढ़ोतरी होने पर यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। किसानों को पराली जलाने से परहेज करने की जरूरत है।
- कैलाश पांडेय, मौसम विशेषज्ञ
शासन के निर्देश के अनुपालन में क्षेत्रवार लेखपाल एवं पुलिस की टीम लगी है। जहां कहीं भी पराली जलाते हुए कोई मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. उज्ज्वल कुमार, जिलाधिकारी