जनपद में 10 हजार से अधिक महिला समूह संचालित, लोकोस एप फीडिंग के साथ चेहरा भी प्रमाणित
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने एसएचजी (सेल्फ हेल्प ग्रुप) से जुड़ी महिलाओं का फेस आथेंटिकेशन (चेहरा प्रमाणीकरण) अनिवार्य कर दिया है। लाभार्थियों की पहचान प्रमाणित करने के लिए शासन स्तर से इसे प्रभावी किया गया है। लोकोस एप पर प्रोफाइल फीडिंग के बाद अनिवार्य रूप से चेहरा प्रमाणीकरण करना होगा।
जनपद में गठित लगभग 10 हजार आजीविका मिशन समूह से करीब एक लाख के आसपास महिलाएं जुड़ी हैं। इस बार शासन ने नए लक्ष्य के साथ लोकोस एप पर चेहरा प्रमाणीकरण की प्रक्रिया अनिवार्य कर दी है। ब्लॉक मिशन प्रबंधक फरेंदा अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह सदस्यों को लोकोस एप पर ऑनलाइन डाटा फीड हुआ है। अब इस एप में चेहरा प्रमाणीकरण भी करना होगा।
बीएमएम ने बताया कि एसएचजी से नए सदस्यों को जोड़ने की प्रक्रिया में केवल आधार कार्ड देना काफी नहीं होगा बल्कि फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरे का मिलान) कराना भी अनिवार्य कर दिया गया है। दोनों प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद ही सदस्यता स्वीकृत होगी। एडीओ आईएसबी नागेंद्र देव पांडेय ने बताया कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं तक पहुंचेगा जो वास्तव में इसकी हकदार हैं। समूहों के माध्यम से मिलने वाले ऋण, वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं का दुरुपयोग रुकेगा।
वर्जन
नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य वास्तविक लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करना और कागजी या फर्जी सदस्यों के शामिल होने की संभावनाओं को पूरी तरह समाप्त करना है।
- मो. जाकिर, एनआरएलएम, महराजगंज