- गड़ौरा मिल पर जिले के किसानों का 7.84 करोड़ का बकाया, बलुआ बिहार के अलाटमेंट पर खरीद
महराजगंज। सीमावर्ती जिला में गन्ना सिर्फ फसल नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक रीढ़ है। सिसवा, निचलौल, घुघली और पुरंदरपुर क्षेत्र का गन्ना अपनी अधिक मिठास और रिकवरी के लिए जाना जाता है। कभी यही गन्ना किसानों की नकदी फसल थी। आज उसी जिले के किसान अपनी मेहनत की कमाई का भुगतान पाने के लिए पिछले छह वर्षाें से इंतजार कर रहे हैं। मामले में विभाग यह कहकर पल्ला झाड़ रहा कि यह गन्ना मिल ने ऑफ रिकार्ड लिया जो गन्ना समिति से नहीं खरीदा गया। ऐसे में कोई बकाया विवरण नहीं है।
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क्या है पूरा मामला
जिला गन्ना अधिकारी ओमप्रकाश सिंह यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला उनके समय का नहीं है। पेराई सत्र 2020-21 का है। उस साल लगभग 50 हजार क्विंटल उपज विभाग ने बलुआ बिहार क्षेत्र बगहां से गड़ौरा चीनी मिल को अलाट किया था। बलुआ बिहार सोहगीबरवां वन्य प्रभाग से जुड़ा जिले से बिहार का सटा हिस्सा है जो बगहां जनपद में आता है। नियमत: गड़ौरा मिल को बगहां के किसानों से गन्ना खरीदना था लेकिन मिल प्रबंधन ने बगहा से गन्ना लाने में अधिक परिवहन खर्च आता देख क्षेत्र में यह प्रचारित किया कि मिल को गन्ना की नितांत जरूरत है। किसान गन्ना पर्ची का इंतजार न करें। अपना आधार व बैंक पासबुक लाकर सीधे मिल को गन्ना दे सकते हैं।
जिला गन्ना अधिकारी के अनुसार निचलौल व सिसवा क्षेत्र का गन्ना आधार व बैंक पासबुक नंबर फीड कराकर खरीद लिया। किसानों को गन्ना खरीद की रसीद भी मिल ने दी। इसमें किसान का नाम, आधार संख्या व गन्ने की मात्रा तो सही भरी गई लेकिन पता बगहां जिले के बलुआ बिहार क्षेत्र का दे दिया जहां से मिल को विभाग से गन्ना खरीदने की अनुमति दी गई थी। इस खेल के सहारे मिल ने हकीकत में सिर्फ बगहां बिहार के 10-20 किसानों का गन्ना क्रय किया, लेकिन भरपाई 1.75 लाख क्विंटल की निचलौल व सिसवां के किसानों से पूरी कर ली। नियमानुसार मिल ने पेराई सत्र बीतने के बाद बलुआ बिहार के सभी किसानों को भुगतान कर बिहार गन्ना विभाग व गन्ना समिति से यह रिकाॅर्ड प्राप्त कर लिया कि मिल पर कोई बकाया नहीं है।
बोले लोग
दिसंबर 2020 में 200 क्विंटल गन्ना गड़ौरा मिल को दिया था। यह प्रचार किया गया कि पर्ची बगहां से आएगी लेकिन गन्ना स्थानीय लगेगा। गन्ना देने के बाद भी कोई भुगतान आज तक नहीं मिला जिससे पिछले दिनों सिसवां गन्ना समिति की बैठक में किसानों को अपने पक्ष में लामबंद कर गड़ौरा मिल को इस बार गन्ना न देने का ऐलान किया है। - मुक्तिनाथ सिंह, किसान, सिसवां बाजार।
पेराई सत्र 2020-21 में गड़ौरा मिल ने उनके क्षेत्र में सैकड़ों का गन्ना आधार व पासबुक लेकर मिल पर तौल करा लिया लेकिन रसीद फीडिंग में गड़बड़ी की और नाम व आधार स्थानीय किसान का लिखा लेकिन पता बलुआ बिहार बगहां जनपद का डाला। ऐसे में जब भुगतान नहीं हुआ तो बिहार भी गए लेकिन वहां पता चला कि जितने किसानों का गन्ना बिका था उनको भुगतान मिल चुका है। ऐसे में मिल ने खेल कर किसानों के हक पर डाका डाला है। - जीतेंद्र बहादुर सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष, सिसवां गन्ना समिति।
सिसवां व निचलौल क्षेत्र के लगभग 400 किसानों का गन्ना बलुआ बिहार (बगहां-बिहार) के अलाटमेंट पर गड़ौरा चीनी मिल ने पेराई सत्र 2020-21 में खरीदा। यह खरीद बिना पर्ची के हुई। आधार कार्ड व बैंक पासबुक लेकर किसानों से गन्ना लिया गया लेकिन भुगतान आज तक नहीं किया। इसी लिए सिसवां गन्ना समिति से जुड़े किसानों ने गड़ौरा मिल को गन्ना न देने का फैसला किया है। सिसवां केन यूनियन किसानों के फैसले से सहमत है। किसानों का हक नहीं जाने देंगे। - वीरेंद्र राव, अध्यक्ष सिसवां केन यूनियन।
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बोले जिम्मेदार
गड़ौरा मिल ने बगहां के बलुआ बिहार से पेराई सत्र 2020-21 में गन्ना खरीदा था। किसानों को भुगतान भी दिया जा चुका है। चार दिन पहले ही जीएम का चार्ज लिया है। किसानों के गन्ना न देने के ऐलान की जानकारी होने पर समिति व प्रभावित किसानों से वार्ता क्रम विभाग के माध्यम से चल रही है। जांच कराने को तैयार हैं कि किसानों का बकाया कैसे रह गया। किसानों की रसीद केन यूनियन के जरिये जमा कराई जा रही। जांच की जाएगा कि रसीद का भुगतान कब और किस खाते में किया गया। इसमें वक्त लग सकता है। इसलिए किसानों को समझाया जा रहा कि गन्ना उपलब्ध न करने का निर्णय वापस लें।
- विश्वामित्र सिंह, जीएम, गड़ौरा चीनी मिल, महराजगंज
नियमत: गड़ौरा चीनी मिल किसानों का बकाया नहीं है। बगहां के नाम पर स्थानीय किसानों से गन्ना लिया गया वही बकाया है। विभाग के पास वही रिकॉर्ड रहते जो गन्ना चीनी मिल समिति से लेती है। किसानों की रकम बड़ी है और संख्या भी अधिक है। किसानों ने गन्ना न देने का जो एलान किया है उसे गंभीरता से लेते हुए मिल प्रबंधन, सिसवां गन्ना समिति के किसानों से वार्ता की जा रही है। पूरे मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी जा चुकी है। - ओमप्रकाश सिंह यादव, जिला गन्ना अधिकारी, महराजगंज।