ट्रायल के तौर पर जिले के 25 किसानों ने करीब 50 एकड़ में बांस की खेती शुरू कर दी, बांस के पौधों को असम से लाया जा रहा
शाहजहांपुर और सीतापुर एथेनॉल फैक्ट्री में जाएंगे महराजगंज में उपज किए बांस
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। महराजगंज के बांस से आने वाले दिनों में एथेनॉल बनेगा। तराई के किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। ट्रायल के तौर पर जिले के 25 किसानों ने करीब 50 एकड़ में बांस की खेती शुरू कर दी है। फिलहाल ये बांस शाहजहांपुर और सीतापुर एथेनॉल प्लांट में भेजे जाएंगे। वहीं बाद में इसका इस्तेमाल जिले में लगने वाले एथेनॉल प्लांट में होगा। बांस की खेती में प्रति एकड़ 60,000 रुपये की लागत है और बांस 200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खेत से ही बिक जाएगा। प्रति एकड़ 200 क्विंटल बांस का उत्पादन होगा।
जानकारी के अनुसार, जिले के सदर, फरेंदा और निचलौल तहसील क्षेत्र के किसानों ने बांस की खेती शुरू की है। बांस की खेती के तरफ किसानों का रुझान काफी तेजी से बढ़ रहा है। कई किसान बांस की खेती करने के लिए पौधे के इंतजार में है। बांस के पौधों को असम से लाया जा रहा है। प्रति एकड़ में 650 पौधे लगे हैं। दो पौधों के बीच की दूरी 6 फीट और पौधों की लाइन से पौधों के बीच की दूरी 12 फीट बनाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार जबतक पौधे छोटे हैं, तब तक नमी के लिए समय से सिंचाई अधिक करनी पड़ रही है। एक वर्ष बाद करीब 15 फीट ऊंचाई तक बढ़ेगा। भारत सरकार एथेनॉल प्रोडक्शन के क्षेत्र में बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। अगले कुछ वर्षों में प्रत्येक जिलों में बांस से एथेनॉल प्रोडक्शन के लिए प्लांट लगेगा, इसीलिए अगले कुछ वर्षों में बांस की मांग और बढ़ेगी।
ग्रीन गोल्ड कही जाने वाली बांस की खेती बंबू मिशन के तहत की जा रही है। परंपरागत खेती के साथ ही पांंच एकड़ भूमि में बांस की खेती की गई है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि किसी भी मौसम में खराब नहीं होगा।
नरेंद्र पटेल, किसान, बहुआर
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बांस की खेती अन्य फसलों से काफी सुरक्षित है। काफी अच्छी कमाई भी की जा सकती है। बांस की फसल को एक बार लगाकर कई साल तक इससे उपज लिया जा सकता है। ट्रायल के तौर पर सात एकड़ भूमि पर बांस की खेती किया हूं।
दिलीप पटेल, किसान, बहुआर
तीन एकड़ जमीन पर बांस की खेती किया हूं। खेती किए एक वर्ष हो चुका है। बांस की ऊंचाई करीब 15 फीट हो चुकी है। बांस से एथेनॉल के अलावा कागज सहित अन्य सामान बनाए जाते हैं। सबसे अच्छी बात यह है फैक्ट्री वाले खुद खेत में आकर बांस की खरीदारी करेंगे।
रामजीत गुप्ता, किसान
पांच एकड़ में ट्रायल के तौर बांस की खेती किया हूं। आने वाले दिनों में इसकी मांग बढ़ने पर अच्छी आमदनी होगी। बेचने के लिए परेशानी नहीं होगी। बंबू मिशन से जुड़े लोगों ने बताया है कि खेत से ही उचित मूल्य पर खरीदारी की हो जाएगा।
महंथ दूबे, पूर्व विधायक, तुकर्हिया
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किसानों के लिए बांस की खेती फायदेमंद
कृषि विज्ञान केंद्र वसूली के कृषि वैज्ञानिक डॉ. वी चंद्रन ने कहा कि किसान एक हेक्टेयर में 1500 से 2500 पौधे लगा सकते हैं। अगर 3 गुणा 2.5 मीटर पर पौधा लगाते हैं, तो एक हेक्टेयर में करीब 1500 पौधे लगेंगे। यानी चार साल बाद 3 से 4 लाख रुपये की कमाई तय है। हर साल रिप्लांटेशन करने की जरूरत नहीं, क्योंकि बांस के पौधे की आयु करीब 40 साल की होती है। भौगोलिक दृष्टि से बांस की खेती लाभकारी साबित होगी। पिछले कुछ सालों से लोग घर के डेकोरेशन से लेकर, ज्वेलरी डिजाइन, फ्लोर डिजाइन, हैंडीक्राफ्ट आइटम्स आदि में बांस का उपयोग कर रहे हैं। इतना ही बांस से एथेनॉल भी बनाया जा रहा है।
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मक्का और गन्ने की अपेक्षा बांस से अधिक मिलता है एथनॉल
बंबू मिशन के सलाहकार दिलीप ने बताया कि मक्का और गन्ने की फसल की अपेक्षा बांस से अधिक मात्रा में एथेनॉल बनाया जा सकता है। बांस से एथेनॉल बनाने में खर्च भी कम आता है। बस जरूरत है इस पर अधिक से अधिक जागरूकता की। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ पैसों की भी बचत होगी। इतना ही नहीं एथेनॉल उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में सेलुलोस की आवश्यकता होती है। बांस में 45 से 50 फीसद तक सेलुलोस होता है। इसमें किसी अन्य उत्प्रेरक की आवश्यकता भी नहीं होती। मक्के की तुलना में बांस से आठ गुना से भी ज्यादा एथेनॉल प्राप्त हो सकता है।
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महराजगंज जिले के निचलौल में लगेगी एथनॉल फैक्ट्री
- बंबू मिशन के सलाहकार दिलीप ने बताया कि कम खर्च और कम मेहनत में किसान बांस की खेती कर किसान मोटी रकम कमा सकते हैं। जिले में तेजी से बांस की खेती बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में जिले के निचलौल तहसील क्षेत्र में एथेनॉल फैक्ट्री लगाई जाएगी। जिससे किसानों को और बेहतर सुविधा के साथ क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलेगा। शाहजहांपुर व सीतापुर एथेनाल प्लांट में बांस भेजा जाएगा।
बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है। किसानों को विभाग की ओर से मिलने वाली जरूरी सुविधा दी जा रही है। किसानों की आय तो दोगुना करने के लिए योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
वीरेंद्र कुमार, जिला कृषि अधिकारी