-पूरी रात घरों से बाहर नदी के किनारे बैठकर लोगों ने गुजारी रात, 10 घंटे में नदी ने 500 मीटर किया कटान
-बोल्डर, जियो बैग डालने के बावजूद नहीं रुक रहा कटान, खैरखुटा टोले में घर के पास पहुंच गई है नदी
-पूरे दिन एक क्रेन, दो जेसीबी और 30 से अधिक मजदूरों की मदद से जारी है कटान रोकने का कार्य
-जलस्तर घटते ही नदी ने बदली धारा, पूर्व प्रधान समेत कई लोगों के पक्के-कच्चे मकान कटान की जद में
तरयासुजान/तमकुहीरोड। अहिरौलीदान गांव के खैरखुटा गांव में नारायणी (गंडक) नदी का जलस्तर नीचे आते ही शनिवार को अचानक कटान तेज हो गया। नदी की बैक रोलिंग शुरू होने से पूर्व प्रधान समेत चार पक्के और कच्चे मकानों पर खतरा मंडराने लगा। पूरी रात लोगों ने बंधे पर दहशत के बीच रात गुजारी। ग्रामीणों के अनुसार 10 घंटे में करीब 500 मीटर कटान कर नदी पक्के मकान के पास पहुंच गई है। कटान बढ़ने से गांव वालों की चिंता बढ़ गई है। तरयासुजान पुलिस और बाढ़ खंड के एक्सईएन और जेई मौके पर जमे हैं।
गौरहा गांव के पास एपी बांध एक सप्ताह पूर्व टूटने से तटवर्ती गांव वालों को बाढ़ की दुश्वारियां झेलनी पड़ी थी। ग्रामीण इससे अभी उबरे भी नहीं कि अहिरौलीदान गांव के खैरखुटा टोले के पास नदी का धारा अचानक जलस्तर कम होने के बाद बदल गई है और कटान तेज हो गया है। शनिवार की शाम से कटान शुरू हुआ, सुबह दस बजे तक नदी बचाव के बाद भी करीब 500 मीटर कटान कर लोगों के मकान तक पहुंच गई है। रविवार को एक क्रेन, दो जेसीबी मशीन, मजदूरों की मदद से बाढ़ खंड बोल्डर, जियो बैग की मदद से कटान को रोकने में प्रशासन जुटा रहा।
गांव के मजिस्टर पासवान, रामपूजन पासवान, भगवान पासवान, सुग्रीव की मकान से करीब तीन फीट की दूरी पर नदी कटान कर रही है। चारों परिवार के लोग पूरी रात मकान के बाहर रहे। राजबली सिंह, हीरा शर्मा, शिवपूजन पासवान, रामाशंकर सिंह, उमेश सिंह आदि लोगों के मकान खतरे में है। गांव वालों ने बताया कि अहिरौलदान के अंतिम छोर पर एपी बांध का करीब दो से ढाई किलोमीटर हिस्सा एक दशक से अधिक समय से संवेदनशील है।
वर्ष 2012 की प्रलयंकारी बाढ़ में बैरिया टोला, कंचन टोला और चित्तू टोला का अस्तित्व गंडक में समा गया था। वहीं नोनियापट्टी, डीह टोला, कचहरी टोला और खैरखुटा गांव भी आंशिक रूप से कटान की चपेट में आए थे। इसके बाद बाढ़ खंड ने इन गांवों के सामने बोल्डर से एप्रन का निर्माण कराकर सुरक्षा का इंतजाम किया था।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों से इस क्षेत्र में प्रभावी बचाव कार्य नहीं कराया गया। इसके चलते नदी के किनारे बनाए गए एप्रन भी जर्जर हो चुके हैं। शनिवार को गंडक का जलस्तर कम होने के बाद नदी में अचानक बैक रोलिंग शुरू हुई।
वर्जन
कटान की सूचना मिलते ही बाढ़ खंड सेवरही के अभियंता मौके पर पहुंचे। विभाग की ओर से बोल्डर और जियो बैग डालकर नदी की धारा को रोकने और कटान की रफ्तार कम करने का प्रयास शुरू कराया गया। रविवार को भी अभियंता और कर्मचारी मौके पर जुटे रहे। पानी कम होने के बाद नदी का बैरोलिंग बढ़ा है, इसलिए खैरखुटा टोले के पास नदी कटान तेजी से कर रही है। कटान को रोकने का कार्य चल रहा है।
- एमके सिंह, एक्सईएन बाढ़ खंड कुशीनगर