खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने जनपद के कई इलाकों से लिए थे 13 नमूने
जांच में 10 नमूने फेल, हानिकारक तत्वों के मिलावट की बात भी आई सामने
महराजगंज। कड़ी धूप और उमस से राहत पाने के लिए आइसक्रीम खाने के शौकीनों को सतर्क रहने की जरूरत है। जनपद में संचालित 30 से अधिक आइक्रीम फैक्ट्रियों में से महज छह के संचालकों के पास जरूरी लाइसेंस है। अन्य बिना मानकों का पालन किए आइसक्रीम का उत्पादन कर बेच रहे हैं। बुधवार को प्राप्त रिपोर्ट में 13 नमूनों में से 10 फेल पाए गए हैं। साथ ही इनमें हानिकारक तत्वों के मिलावट की बात भी सामने आई है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधी प्रशासन विभाग ने अप्रैल और मई महीने में अभियान चलाकर जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से 13 आइसक्रीम के नमूने लिए थे। जांच में 13 में से 10 नमूने फेल पाए गए हैं। फेन नमूनों में फैट कम पाया गया है और मिलावट की बात भी सामने आई है। ऐसे में गर्मी से बचने के लिए आइसक्रीम खाना कई तरह की बीमारियों का शिकार बना सकता है।
जनपद में करीब 30 से अधिक आइसक्रीम व बर्फ तैयार करने वाली इकाइयां संचालित हैं। हालांकि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार, महराजगंज शहर में ही करीब छह लाइसेंस धारक हैं। यह सभी अपने कई तरह के आइसक्रीम का उत्पादन करते हैं। वहीं कई इकाइयां ऐसी भी संचालित हो रही हैं जिनके पास लाइसेंस नहीं है। यह इकाइयां बिना मानकों को पूरा किए और साफ-सफाई का ध्यान रखे बिना ही आइसक्रीम का उत्पादन करती हैं। यह बाजार में अपने उत्पाद भी सस्ते दर पर बेचती हैं।
स्थानीय स्तर पर बनने वाली कुल्फी और बर्फ के गोलों में अक्सर बिना छने और दूषित पानी का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें बैक्टीरिया मौजूद होते हैं। इन्हें बनाने और स्टोर करने के दौरान साफ-सफाई का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जाता, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधी प्रशासन विभाग के अनुसार, बिना लाइसेंस के संचालित हो रही इकाइयों में असली दूध या क्रीम के बजाय घटिया क्वालिटी के पाम ऑयल, हाईड्रोजनीकृत वसा और सिंथेटिक दूध का इस्तेमाल होता है। इन्हें आकर्षक बनाने के लिए प्रतिबंधित नॉन-परमिटेड फूड कलर्स और कृत्रिम मिठास (जैसे अत्यधिक सैक्रीन) मिलाई जाती है। ये केमिकल शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।
नौतनवा, फरेंदा और निचलौल से लिए थे नमूने
जनपद में दो माह में करीब 13 नमूने लिए गए हैं जिसमें से 10 नमूने फेल पाए गए हैं। इसमें फैट कम पाया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने नौतनवा, निचलौल, फरेंदा से अलग-अलग स्थानों से नमूने लिए थे। विभाग केवल साफ-सफाई के निर्देश देने तक ही सिमट गया है। कोई ठोस कार्रवाई न होने के चलते धंधेबाज लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। नमूना फेल होने पर 30 दिन का नोटिस जारी होता है, अगर वह नोटिस को चैलेंज नहीं करता है तो आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होती है। अगर कोई नमूना असुरक्षित पाया जाता है तो सीजेएम कोर्ट में और अधोमानक मिलने पर में एडीएम कोर्ट में प्राथमिकी दायर किया जाता है।
कितनी पंजीकृत हैं आइसक्रीम इकाइयां, नहीं बता सका विभाग
इस संबंध में जब विभाग के जिम्मेदार से पूछा गया कि जिले भर में कितनी आइसक्रीम इकाइयां पंजीकृत हैं तो वह जवाब नहीं दे सके। उनका एक ही जवाब था आज हमारी टीम फिल्ड में जांच करने गई है इसकी जानकारी कल मिल सकेगी।
साफ-सफाई को होने चाहिए इंतजाम
खाद्य विभाग के अनुसार, फैक्ट्री किसी भी प्रदूषित इलाके, गंदे नालों या कचरे के डंप से दूर होनी चाहिए। फर्श पक्का, गैर-फिसलन वाला और पानी की निकासी की उचित ढलान वाला होना चाहिए। दीवारों पर टाइल्स लगी होनी चाहिए ताकि आसानी से धुलाई और सफाई हो सके। फैक्ट्री में हवा के आवागमन और पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। फैक्ट्री में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को साफ एप्रन, ग्लब्स और हेडकैप पहनना अनिवार्य है।
दो फैक्ट्रियों पर लगा था 75 हजार रुपये जुर्माना
आइसक्रीम में फैट एवं टोटल सालिड की मात्रा कम मिलने पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने दो फैक्ट्रियों पर 75 हजार रुपये लगाया था। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी केके उपाध्याय के अनुसार, गजरू टोला, सिसवा बाजार थाना कोठीभार निवासी खाद्य कारोबारी मनोज कुमार की आइसक्रीम निर्माण इकाई से लिए गए नमूने जांच में मानक के अनुरूप नहीं पाए गए थे। जांच रिपोर्ट में आइसक्रीम में फैट एवं टोटल सालिड की मात्रा निर्धारित मानक से कम मिली थी। मामले में न्यायालय ने मनोज कुमार पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। इसी प्रकार इसी पते पर संचालित इकाई से लिए गए चोकोबार (फ्रोजन डेजर्ट) के नमूने में भी फैट की मात्रा निर्धारित मानक से कम पाई गई थी। इस मामले में भी मनोज कुमार को दोषी मानते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
वर्जन
मिलावटी आइसक्रीम खाने से किडनी को दिक्कत हो सकती है। लिवर भी खराब हो सकता है। मिलावटी आइसक्रीम खाने से उल्टी, दस्त, पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग भी हो सकता है। टॉन्सिल, गंभीर खांसी, गले में इन्फेक्शन और सांस लेने में तकलीफ हो सकता है। दूषित पानी के कारण टाइफाइड बुखार और हेपेटाइटिस-ए हो सकती हैं।
-डाॅ. भानू प्रताप सिंह, फिजिशियन
वर्जन
आइसक्रीम बनाने वाली यूनिटों की नियमित जांच की जाती है। नमूने फेल होने पर कार्रवाई की जाती है। अप्रैल माह में 13 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे इनमें से 10 नमूने फेल हो गए हैं।
-केके उपाध्याय, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, महराजगंज