फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूर्वांचल का मिनी बाबा धाम, इटहिया शिव मन्दिर

Mon, 18 Jul 2016 11:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला महराजगंज
विज्ञापन
इटहिया शिव मन्दिर। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
 मिनी बाबा धाम के नाम से विख्यात प्रसिद्ध शिव मंदिर इटहिया के पंचमुखी शिवलिंग के इतिहास के संबंध में पुराणों में कोई उल्लेख नहीं मिलता है। लेकिन जनश्रुतियों के अनुसार इस पंचमुखी शिवलिंग के प्रादुर्भाव की कहानी निचलौल स्टेट के राजा बृषमसेन के साथ जुड़ी हुई है।
विज्ञापन

जनपद के निचलौल तहसील क्षेत्र के अन्तर्गत पंचमुखी शिवलिंग इटहिया के ऐतिहासिकता के संदर्भ में स्थानीय लोगों एवं जनश्रुतियों के अनुसार राजा बृषमसेन अत्यन्त ही प्रतापी एवं न्याय प्रिय राजा थे। वह भगवान शंकर के अनन्य भक्त थे उनके गौशाला में एक नन्दनी नाम की गाय थी। इसे राजा बहुत मानते थे तथा सुबह शाम उसका दर्शन करते थे तथा उसी के दूध का सेवन भी करते थे।
उस समय इटहिया सहित यह समूचा क्षेत्र घने जंगलों से आच्छादित था। नन्दनी गाय उसी जंगल में घास चरती थी। कुछ दिन के बाद नन्दनी ने दूध देना बन्द कर दिया और अपना दूध जंगल के घने झाड़ियों में जमीन पर चढ़ाने लगी।
विज्ञापन

जब राजा बृषमसेन को यह जानकारी हुई तो उन्होंने उक्त स्थान पर खुदाई कराया। वहां एक पंचमुखी शिवलिंग मिला इसे देख कर राजा भाव विह्वल हो गए तथा पंचमुखी शिवलिंग का राजा प्रतिदिन सर्व प्रथम पूजा अर्चना करने लगे इसके परिणाम स्वरूप राजा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई इसका नाम रत्नसेन पड़ा। राजा बृषमसेन की मृत्यु के बाद उनके पुत्र रत्नसेन निचलौल के राजा हुए तथा अपने पिता की तरह अपनी पत्नी स्वर्ण रेखा के साथ प्रतिदिन पंचमुखी शिवलिंग की पूजा अर्चना किया करते थे।
राजा रत्नसेन के शासन कॉल में एक दिन कुछ चोर रात्रि में चोरी के उद्देश्य से राज्य में प्रवेश कर रहे थे। जब वे पंचमुखी महादेव मंदिर के सामने पहुंचे तो मन्दिर के अन्दर से आवाज आई कि गांव वालों जागो चोर चोरी करने गांव में आ गए हैं। इससे गांव के लोग जग गए और चोर भाग गए।
पंचमुखी शिवलिंग पर गड़ौरा निवासी स्व. चन्द्रशेखर मिश्र ने 1968-69 में मन्दिर का निर्माण कराया जो वर्तमान में मौजूद है। यह मन्दिर अनेक चमत्कारी घटनाओं से जुड़ा हुआ। श्रद्धालुओं द्वारा मांगे गए मुरादों को पंचमुखी महादेव शीघ्र पूरा करते हैं। श्रद्धालुओं की मनौती पूर्ण होने और आस्था का केन्द्र होने के कारण अब लोगों ने इस मन्दिर को मिनी बाबा धाम के संज्ञा दे दी है। इसलिए यहां श्रावण मास में पूरा एक माह मेला लगता है। लाखों श्रद्धालु पड़ोसी राज्य विहार व नेपाल से भी आते हैं। और जलाभिशेष व पूजा अर्चना करते हैं। पूरा श्रावण मास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें